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दुर्ग-भिलाई
दुर्ग। केंद्र सरकार के वित्तीय बजट का चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने स्वागत किया है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अनूप गटागट ने इस बजट को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए यह बजट तैयार किया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार बजट 12.20 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। बजट 2026 आम आदमी, किसान, युवा और छोटे उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने वाला बजट है। यह स्वावलंबी भारत के संकल्प को मजबूती देगा। देश को विकसित भारत की दिशा में आगे ले जाएगा। मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिया गया जोर बजट 2026 को रोजगार और स्वावलंबन का बजट बनाता है। यह छोटे व्यापारियों के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है। बजट 2026 भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की मजबूत नींव रखता है। यह नीति, निवेश और विश्वास तीनों को एक साथ जोड़ता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा कमजोरी, मंदी की आशंकाओं और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए यह बजट सतत विकास की दिशा में एक व्यावहारिक और दूरदर्शी प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ऐसे समय में जब विश्व की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ दबाव में हैं। भारत के इस बजट में घरेलू मजबूती पर विशेष फोकस किया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए लगभग 12.20 लाख करोड़ का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया गया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों और रोजगार सृजन को गति मिलेगी।
एमएसएमई क्षेत्र, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, उसके सशक्तिकरण हेतु 10,000 करोड़ का विशेष एमएसएमई ग्रोथ फंड प्रस्तावित किया गया है, ताकि छोटे एवं मध्यम उद्योगों को वित्तीय मजबूती, तकनीकी उन्नयन और रोजगार सृजन में सहायता मिल सके। इसके साथ ही परिवहन एवं कनेक्टिविटी—जैसे सड़क, रेल, जलमार्ग और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क—के विस्तार पर जोर दिया गया है, जिससे व्यापार की लागत कम हो और देश के दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। कुल मिलाकर, यह बजट वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर, मजबूत और दीर्घकालिक विकास की राह पर ले जाने का स्पष्ट संकेत देता है।
यह पहला बजट है, जो कर्तव्य भवन में बना है। इस बजट के तीन प्रमुख कर्तव्य आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा देना, जनता की उम्मीदों को पूरा करना, सबका साथ, सबका विकास। गरीब, किसान, युवा, महिला, मध्यम वर्ग, व्यापारी, श्रमिक एवं उद्यमियों सभी वर्गों व क्षेत्रों के हितों का समावेश किया गया है। इस बजट में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, रोजगार सृजन, स्टार्टअप, एमएसएमई, डिजिटल इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत को नई गति देने वाले प्रावधान किए गए हैं।
इंडिया सेमिकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 का शुभारंभ जल्द करने की घोषणा की गई है। इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट विनिर्माण योजना के लिए परिव्यय बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये हो जाएंगे। खादी, हथकरघा और हस्तशिल्पों को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल का शुभारंभ किया जाएगा। प्राकृतिक, मानव निर्मित और न्यू ऐज फाइबर में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना, लघु, मध्यम उद्यमों को चैंपियन बनाना और सूक्ष्म उद्यमों को सहायता प्रदान करने की योजना, कार्बन कैप्चर उपयोग और संग्रहण (सीसीयूएस) के लिए अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव, दिव्यांगजन कौशल योजना, दिव्यांजन सहारा योजना, ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम के लिए शी-मार्टस, बहु भाषीय एआई टूल, 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, 2047 तक भारत को सेवा क्षेत्र में 10% वैश्विक हिस्सेदारी के साथ ग्लोबल लीडर बनाना, 1,000 करोड़ से अधिक लागत के एकल बॉन्ड इश्यू करने के लिए 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि, आईटी सेवाओं में सुरक्षित हार्बर प्राप्त करने के लिए लागत मूल्य को 300 करोड़ से 2000 करोड़ करने का प्रस्ताव, तेंदूपत्ता उद्योग से जुड़े लोगों के लिए टीसीएस की दर 5% घटाकर सिर्फ 2% की गई है, भारत बनेगा मेडिकल टूरिज्म हब राज्यों को देश में पांच रीजनल हब स्थापित करने में मिलेगी मदद, सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राज्यों को धन हस्तांतरण में 41% की हिस्सेदारी बरकरार रखने का निर्णय लिया है, केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को 14 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, सरकारी खरीद की जानकारी साझा करने के लिए जेम को ट्रेड्स से जोड़ा जाएगा, ट्रेड्स के जरिए एमएसएमई को 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग करने सहित अनेक घोषणाएं बजट में की गई हैं।
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