- खेत भ्रमण, पौधारोपण और किसान संवाद के माध्यम से आधुनिक कृषि को मिला नया संबल
- धान से बागवानी की ओर बढ़ते किसान, ड्रोन-डिजिटल खेती और योजनाओं पर मंत्री का फोकस

दुर्ग। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार, 31 जनवरी 2026 को दुर्ग जिले का एक दिवसीय प्रवास पर रहें। इस दौरान उन्होंने ग्राम गिरहोला एवं खपरी में खेत भ्रमण, वृक्षारोपण तथा किसान संवाद कार्यक्रमों में भाग लिया। दौरे का मुख्य उद्देश्य किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर आधुनिक कृषि तकनीकों, केंद्र सरकार की योजनाओं और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करना रहा।
-ग्राम गिरहोला में वृक्षारोपण से दौरे की हुई शुरुआत
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान सर्वप्रथम ग्राम गिरहोला पहुंचे, जहां उन्होंने आम के पौधे का वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों के लिए दीर्घकालीन आर्थिक लाभ का भी स्रोत बन सकता है। वृक्षारोपण के पश्चात् केंद्रीय मंत्री ने यहां उन्होंने कृषि फार्मों में अपनाई जा रही नवीन खेती तकनीकों, फसल विविधीकरण एवं उत्पादन पद्धतियों का गहन अवलोकन किया। इस दौरान मंत्री श्री चौहान ने स्थानीय किसानों से सीधी बातचीत की और बागवानी फसलों में आ रही समस्याओं के समाधान पर मार्गदर्शन दिया। किसानों ने भी अपने अनुभव, सुझाव एवं चुनौतियां साझा कीं, जिन पर मंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
-खपरी में अनिल कृषि फार्म का दौरा एवं किसान संवाद
इसके पश्चात् केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान, ग्राम खपरी के अनिल कृषि फार्म पहुंचे, जहां उन्होंने खेतों का निरीक्षण किया और स्थानीय किसानों से संवाद किया। खपरी में आयोजित बैठक में किसानों एवं अधिकारियों के साथ कृषि संबंधी समस्याओं, उत्पादन लागत, विपणन एवं विकास कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गई।
-किसान चौपाल में हुआ प्रेरक कृषक संवाद
किसान चौपाल में आयोजित कृषक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सर्वप्रथम प्रगतिशील किसानों को बधाई दी। उन्होंने किसानों से संवाद की शुरुआत करते हुए पूछा कि पहले कौन-सी खेती की जाती थी, उससे कितना लाभ होता था और अब बागवानी खेती से कितना फायदा हो रहा है। किसानों ने बताया कि धान की पारंपरिक खेती की तुलना में बागवानी फसलों से अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। इस पर मंत्री श्री चौहान ने फसल विविधीकरण को समय की आवश्यकता बताते हुए अन्य किसानों को भी बागवानी एवं आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
-सरकार की प्रमुख कृषि योजनाओं पर विशेष जोर
किसान संवाद के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिनमें प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना-छोटे एवं सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष लाभांतरण, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना - प्राकृतिक आपदाओं से फसलों की सुरक्षा, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना - कृषि नवाचार एवं उत्पादन वृद्धि, डिजिटल कृषि मिशन- तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा, ड्रोन तकनीक- फसल निगरानी, कीटनाशक छिड़काव एवं लागत में कमी, प्राकृतिक खेती एवं सूक्ष्म सिंचाई योजनाएं - सतत एवं जल-संरक्षित कृषि उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक इन योजनाओं से जुड़कर अपनी आय में वृद्धि करें।
-ग्रामीण विकास योजनाओं से गांवों को मजबूत बनाने का संदेश
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कृषि के साथ-साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजनाओं पर भी विशेष चर्चा की, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से गांवों की बुनियादी संरचना, आजीविका और आत्मनिर्भरता को सशक्त बनाया जा रहा है।
-छत्तीसगढ़ सहित देशभर में किसानों की आय बढ़ाने का संकल्प
अपने संबोधन में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में किसानों की आय बढ़ाना, कृषि को लाभकारी बनाना और गांवों को सशक्त करना है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और किसानों की मेहनत से कृषि क्षेत्र में नई क्रांति आएगी।
-कृषि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण दौरा
केंद्रीय कृषि मंत्री का यह एकदिवसीय दौरा राज्य में कृषि बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, किसानों को जागरूक करने और उनकी आय में वृद्धि लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
केन्द्रीय कृषि मंत्री के ग्राम भ्रमण के दौरान प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा, कृषि एवं किसान कल्याण तथा आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा, विधि एवं कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव, विधायक अहिवारा डोमन लाल कोर्सेवाड़ा और कृषि अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित थे।
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