दुर्ग। छत्तीसगढ़ में आमजन की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए चाईनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर द्वारा 25 फरवरी 2017 को जारी अधिसूचना के तहत नायलोन, सिंथेटिक अथवा किसी भी प्रकार के धारदार पदार्थ युक्त धागे, जिसे आमतौर पर चाईनीज मांझा कहा जाता है, के उत्पादन, विक्रय, भंडारण, आपूर्ति एवं उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। इसके बावजूद समय-समय पर चाईनीज मांझे के इस्तेमाल से होने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसे लेकर प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल ने चिंता जताई है।
पर्यावरण संरक्षण मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार चाईनीज मांझे के कारण लगातार गंभीर दुर्घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं। कई मामलों में यह मांझा राह चलते दोपहिया वाहन चालकों के गले, हाथ या चेहरे में फंस गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ घटनाओं में तो लोगों की जान तक चली गई है। खासकर त्योहारों और पतंगबाजी के मौसम में यह मांझा आम नागरिकों, बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि चाईनीज मांझा न केवल मानव जीवन के लिए खतरनाक है, बल्कि यह पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी अत्यंत घातक है।
कई बार यह मांझा पेड़ों, बिजली के तारों और खुले स्थानों में फंसा रह जाता है, जिससे पक्षियों के पंख कट जाते हैं या वे उसमें उलझकर दम तोड़ देते हैं। इसके अलावा नायलोन और सिंथेटिक पदार्थ से बने होने के कारण यह मांझा लंबे समय तक नष्ट नहीं होता, जिससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचता है। पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि चाईनीज मांझे के निर्माण, बिक्री या उपयोग में लिप्त पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई व्यक्ति या व्यापारी चाईनीज मांझा बेचते या इस्तेमाल करते पाया गया तो उसके विरुद्ध कानूनी प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और नगर निकायों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मंडल ने आम नागरिकों से अपील की है कि पतंग उड़ाने के दौरान केवल सूती धागे का ही उपयोग करें और चाईनीज मांझे से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। साथ ही अपने परिवार, बच्चों और आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करें। प्रशासन का मानना है कि जब तक समाज स्वयं जागरूक नहीं होगा, तब तक इस खतरनाक मांझे पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है। पर्यावरण संरक्षण मंडल ने यह भी कहा है कि जनसुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है। थोड़ी सी लापरवाही किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। इसलिए सुरक्षित पतंगबाजी को अपनाएं और चाईनीज मांझे के खिलाफ अभियान को सफल बनाने में प्रशासन का सहयोग करें।
संपादक- पवन देवांगन
पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)
ई - मेल : dakshinapath@gmail.com
मो.- 9425242182, 7746042182
हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।
सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved
Powered By Global Infotech.