होम / छत्तीसगढ़ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन का किया लोकार्पण कहा – “यह भवन लोकतंत्र का तीर्थ स्थल है, इसकी भव्यता से अधिक महत्वपूर्ण यहां लिए जाने वाले जनकल्याण के निर्णय होंगे”
छत्तीसगढ़
-अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार होते देख भावुक हुए प्रधानमंत्री, कहा – ‘छत्तीसगढ़ आज आत्मविश्वास से भरा है’
-नई विधानसभा को बताया “लोकतंत्र का तीर्थ स्थल”।
-भवन में झलकती है छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, बस्तर आर्ट और महापुरुषों की प्रेरणा।
छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक परंपरा को “मुरिया दरबार” से जोड़ा।
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नवा रायपुर में निर्मित छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन का भव्य लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यपाल रमन डेका, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत सहित अनेक जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान और पारंपरिक वादन से हुआ। इसके पश्चात प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के लिए भी स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक भवन का लोकार्पण नहीं, बल्कि 25 वर्षों की जन-आकांक्षा, जन-संघर्ष और जन-गौरव का उत्सव है।”
उन्होंने छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस धरती से उनका आत्मीय जुड़ाव बहुत पुराना है। “मैंने कार्यकर्ता के रूप में छत्तीसगढ़ में वर्षों बिताए हैं, यहां की मिट्टी ने मुझे गढ़ा है। इस राज्य की यात्रा के हर पड़ाव का मैं साक्षी रहा हूं,”
प्रधानमंत्री ने भावुक होकर कहा।

उन्होंने संविधान सभा में छत्तीसगढ़ से जुड़े महान विभूतियों — रविशंकर शुक्ल, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल, घनश्याम सिंह गुप्त, किशोरी मोहन त्रिपाठी, रामप्रसाद पोटाई और रघुराज सिंह — को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि दी और कहा कि इन विभूतियों ने बाबा साहेब अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्माण में अमूल्य योगदान दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2000 में जब अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया, तो वह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि आत्म-सम्मान और विकास की नई राह का आरंभ था। उन्होंने कहा, “आज अटल जी की आत्मा देख रही होगी — उनका छत्तीसगढ़ आत्मविश्वास से भरा है, विकास के नए शिखर छू रहा है।”
उन्होंने कहा कि यह नई विधानसभा लोकतंत्र का तीर्थ स्थल है। “इसका हर स्तंभ पारदर्शिता का प्रतीक है, हर गलियारा जवाबदेही की याद दिलाता है और हर कक्ष जनता की आवाज़ का प्रतिबिंब है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दशकों तक इस भवन में लिए गए निर्णय छत्तीसगढ़ की नियति तय करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह भवन राज्य की नीति, नियति और नीतिकारों का केंद्र बनेगा।
.jpeg)
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई विधानसभा देश की विरासत और विकास के समन्वय की झलक प्रस्तुत करती है। इस भवन की दीवारों और कला में बस्तर आर्ट की सौंदर्य झलकती है, जो राज्य की सृजनशीलता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि उन्होंने थाईलैंड के प्रधानमंत्री को भी बस्तर आर्ट का उपहार दिया था।
प्रधानमंत्री ने भवन की संरचना में निहित सांस्कृतिक प्रतीकों का उल्लेख करते हुए कहा, “इन दीवारों में बाबा गुरु घासीदास जी का ‘मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश गूंजता है, माता शबरी की आत्मीयता और संत कबीर की निडरता इस सदन के हर हिस्से में विद्यमान है, जबकि इसकी नींव में महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की नर सेवा, नारायण सेवा की भावना है।”
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ की आदिवासी परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि यह भूमि लोकतांत्रिक संस्कृति की जननी है। “बस्तर का मुरिया दरबार – एक ‘आदिम संसद’ का जीवंत उदाहरण है। मुझे प्रसन्नता है कि इस परंपरा को नए विधानसभा में भी सम्मान मिला है।”

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे कार्यकर्ता से लेकर मुख्यमंत्री और अब अध्यक्ष पद तक के अपने सफर से लोकतंत्र की सच्ची भावना को जी रहे हैं। “क्रिकेट में तो कप्तान खिलाड़ी बनकर खेलता है, पर राजनीति में यह दुर्लभ है। रमन सिंह जी ने यह मिसाल कायम की है,”
प्रधानमंत्री ने कहा।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रकवि निराला की कविता उद्धृत करते हुए कहा कि यह भवन “नव स्वर” का प्रतीक है, जो परंपरा से जुड़कर आत्मविश्वास से भविष्य की ओर बढ़ते भारत की पहचान है।
उन्होंने कहा कि इस विधानसभा की असली श्रेष्ठता इसकी भव्यता में नहीं, बल्कि यहां होने वाले जनकल्याणकारी निर्णयों में होगी। “हर निर्णय ऐसा हो, जो किसान की मेहनत को सम्मान दे, युवा के सपनों को दिशा दे, नारीशक्ति के जीवन में नई आशा जगाए और अंत्योदय का माध्यम बने।”
प्रधानमंत्री ने भगवान श्रीराम का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। “राम से राष्ट्र का अर्थ है — सुशासन और जनकल्याण की भावना से शासन। ऐसा भारत जहां कोई दुखी या गरीब न हो, हर व्यक्ति स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानित जीवन जी सके,”
उन्होंने कहा।

प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज आतंकवाद और नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। “जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सलवाद से पहचाना जाता था, वही आज समृद्धि, सुरक्षा और स्थायित्व का प्रतीक बन रहा है,”
प्रधानमंत्री ने कहा।
उन्होंने बस्तर ओलंपिक जैसी पहलों की सराहना की और कहा कि अब छत्तीसगढ़ विकास और संस्कृति दोनों में अग्रणी बन रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भूमिका निर्णायक होगी। “यह विधानसभा ऐसा उदाहरण बने, जो देश के हर राज्य को प्रेरित करे,” उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया।
अंत में प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र में कर्तव्य को सर्वोपरि रखने की आवश्यकता पर बल दिया। “यह भवन केवल कानून बनाने का स्थान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के भाग्य निर्माण का प्रखर केंद्र है। हमें हर निर्णय में जनसेवा और विकास की भावना रखनी होगी,”
उन्होंने कहा।
कार्यक्रम के समापन पर प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह को इस भव्य कल्पना को साकार करने के लिए बधाई दी और कहा, “आइए, हम सभी इस नव मंदिर से यह संकल्प लेकर जाएं कि जनता-जनार्दन की सेवा ही हमारे जीवन का सर्वोच्च ध्येय होगा।”
संपादक- पवन देवांगन
पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)
ई - मेल : dakshinapath@gmail.com
मो.- 9425242182, 7746042182
हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।
सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved
Powered By Global Infotech.