दुर्ग। नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने तेज डीजे और अत्यधिक ध्वनि से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर सामने आ रही चिंताजनक रिपोर्टों पर दुर्ग जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन आदेश जारी करने में आगे और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में पीछे क्यों दिखाई देता है? डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि दुर्ग जिले में जिला प्रशासन पहले ही रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर एवं ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध तथा ध्वनि की निर्धारित सीमा के पालन के निर्देश जारी कर चुका है। कुछ दिन पहले भी दुर्ग पुलिस ने डीजे एवं साउंड सिस्टम संचालकों की बैठक लेकर भी इन्हीं नियमों का पालन करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद यदि नागरिकों को तेज डीजे और अत्यधिक शोर का सामना करना पड़ रहा है तो जिला प्रशासन का निगरानी तंत्र आखिर मूकदर्शक क्यों बना हुआ है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि कागज पर नियम मौजूद हैं।समय सीमा निर्धारित है,डेसिबल सीमा निर्धारित है,अनुमति की व्यवस्था है और उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी है।इसके बावजूद यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो केवल बैठक लेकर या चेतावनी जारी करके प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि यह सिर्फ शोर या मनोरंजन का विषय नहीं है।तेज आवाज से नींद, तनाव और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की चिंता विशेषज्ञों द्वारा लगातार व्यक्त की जाती रही है।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कार्यवाही से संबंधित प्रकाशित सामग्री में भी डीजे के तेज शोर को हृदय रोगियों के लिए खतरनाक बताया गया था। जिला प्रशासन द्वारा हृदय रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों की परेशानी को नजरअंदाज किया जाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने कहा कि किसी आयोजन की खुशी किसी हृदय रोगी की रात की नींद,किसी बुजुर्ग की शांति, किसी बच्चे की पढ़ाई या किसी मरीज के स्वास्थ्य पर भारी नहीं पड़नी चाहिए।नागरिकों को कागजी प्रतिबंध नहीं,वास्तविक राहत चाहिए। जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि त्योहार और सामाजिक आयोजन पूरे उत्साह से हों,लेकिन कानून और नागरिकों के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि कार्रवाई केवल डीजे संचालक तक सीमित नहीं होनी चाहिए।यदि किसी आयोजन में निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि का उपयोग हो रहा है तो आयोजक समिति और मौके पर निगरानी करने वाले संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांची जानी चाहिए।
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