होम / दुर्ग-भिलाई / बीएसएनएल अधिकारी-कर्मचारी मोर्चा के संयुक्त केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर देशभर में आंदोलन का आगाज
दुर्ग-भिलाई
दुर्ग। बीएसएनएल अधिकारी-कर्मचारी मोर्चा के संयुक्त केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर देशभर में आंदोलन का आगाज बुधवार को भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन और नारेबाजी के साथ हुआ। इसी कड़ी में दुर्ग स्थित बीएसएनएल कार्यालय के मुख्य द्वार पर अधिकारी-कर्मचारियों ने सभा आयोजित कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
सभा को संबोधित करते हुए बीएसएनएलईयू दुर्ग के आर.एस. भट्ट ने कहा कि सरकार तीसरे वेतनमान को लागू करने के मामले में अफोर्डेबिलिटी (वहनीयता) की शर्त के तहत घाटे में चल रही कंपनी के कर्मचारियों को लाभ देने से इंकार कर रही है। उन्होंने कहा कि बीएसएनएल को ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में संचार सुविधा उपलब्ध कराने, पंचायतों एवं स्कूलों तक संचार सेवाएं पहुंचाने सहित विभिन्न सरकारी परियोजनाओं की जिम्मेदारी दी जाती है। इन परियोजनाओं में होने वाले आर्थिक नुकसान का भार कंपनी पर पड़ता है और इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भट्ट ने कहा कि यदि बीएसएनएल सरकारी परियोजनाओं से हाथ खींच ले तो डिजिटल इंडिया के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि निजी दूरसंचार कंपनियां सरकारी योजनाओं में इसी तरह के नुकसान का भार उठाने के लिए आगे नहीं आतीं। उनके अनुसार बीएसएनएल की मौजूदगी ने निजी दूरसंचार कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क वसूली के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार निजी दूरसंचार सेवाओं को लेकर यूनियन पदाधिकारियों ने पूर्व में एकाधिकार की आशंका जताई थी, उसी तरह बीएसएनएल को कमजोर किए जाने से दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संरक्षण में निजी दूरसंचार कंपनियों ने उपभोक्ताओं का दोहन किया है।
सहायक महाप्रबंधक लोकेश ठाकुर ने कहा कि अधिकारी-कर्मचारियों को एकजुट होकर संघर्ष करने पर ही उनका अधिकार मिल सकता है। उन्होंने आंदोलन के आगामी चरणों में वेतन कटौती जैसी कार्रवाई के लिए भी सभी कर्मचारियों से तैयार रहने का आह्वान किया।
उपमंडल अभियंता राव ने कहा कि बीएसएनएल कर्मचारियों को वेतन आयोग का अंतिम लाभ वर्ष 2007 में मिला था। उन्होंने उस समय और वर्तमान में सोने की कीमतों में आए अंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि महंगाई और जीवन-यापन की लागत में लगातार वृद्धि हुई है, जबकि कर्मचारियों को वेतन संबंधी अपेक्षित लाभ नहीं मिला है।
धन्यवाद ज्ञापन देते हुए दीपक कुमार सिंह ने कहा कि बीएसएनएल के लगभग चार लाख कर्मचारी और पेंशनर अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष की तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने सभी से आंदोलन को मजबूती प्रदान करने की अपील की। प्रदर्शन में पी.के. वर्मा, महेश, सचिन सोनी, संतोष सोनी, महेश उइके, बी.बी. देवांगन, गोमती राय, संदीप श्रीवास्तव, गीतेश पटेल, दिग्विजय सिंह ठाकुर सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
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