होम / बड़ी ख़बरें / हरेली तिहार पर नगर निगम ने दिया हरियाली और छत्तीसगढ़ी संस्कृति संरक्षण का संदेश
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-छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना के साथ हुआ हरेली तिहार का शुभारंभ, गोधन व कृषि औजारों की पूजा; 150 से अधिक पौधों का रोपण
दुर्ग। सावन अमावस्या के अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व एवं छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार माने जाने वाले हरेली तिहार का नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा बुधवार को कृषि उपज मंडी परिसर, धमधा रोड में पारंपरिक उल्लास के साथ आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति, खेती-किसानी और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं के संरक्षण के साथ शहर में हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर अलका बाघमार ने सभापति श्याम शर्मा, प्रभारी आयुक्त मोहेंद्र साहू एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर पूजा-अर्चना कर किया। इस दौरान अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए गोधन तथा कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले पारंपरिक औजारों की विधिवत पूजा की गई। जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने गेड़ी चलाकर हरेली पर्व की पारंपरिक रौनक बढ़ाई।
-एक पेड़ मां के नाम के तहत 150 से अधिक पौधों का रोपण
हरेली तिहार के अवसर पर कृषि मंडी परिसर में महापौर अलका बाघमार, सभापति श्याम शर्मा, एमआईसी सदस्य देव नारायण चन्द्राकर, काशीराम कोसरे, नरेंद्र बंजारे, लीना दिनेश देवांगन, शेखर चन्द्राकर, ज्ञानेश्वर ताम्रकर, शिव नायक, हर्षिका संभव जैन एवं पार्षद युवराज कुंजम सहित जनप्रतिनिधियों ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत 150 से अधिक पौधों का रोपण किया।
पौधरोपण के माध्यम से नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और शहर को हरा-भरा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। पर्यावरण प्रेमी एवं स्वच्छ सर्वेक्षण ब्रांड एंबेसडर डॉ. विश्वनाथ पाणिग्राही द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान “एक पेड़ मां के नाम” को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार पोस्टर भी प्रदर्शित किया गया। अतिथियों ने पोस्टर के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक पौधरोपण करने और लगाए गए पौधों की देखभाल का संकल्प दिलाया।
-पारंपरिक खेलों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में पटरीपार क्षेत्र की महिलाओं ने फुगड़ी सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। वहीं उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने गेड़ी चलाकर लोगों का उत्साहवर्धन किया। इससे कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और पारंपरिक पर्व का रंग देखने को मिला।
-हरेली खेती, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा पर्व : महापौर
महापौर अलका बाघमार ने कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, खेती-किसानी और प्रकृति से गहराई से जुड़ा पर्व है। यह हरियाली, नई फसल की शुरुआत और किसानों की खुशहाली का संदेश देता है। हरेली के दिन किसान अच्छी फसल की कामना के साथ ईष्ट देव, गोधन और खेती-किसानी में उपयोग होने वाले औजारों की पूजा करते हैं। हल, कुदाली, फावड़ा और ट्रैक्टर आदि को साफ कर पूजा करने की परंपरा इस पर्व की विशेष पहचान है।
उन्होंने कहा कि नीम की पत्तियों और गोबर से बनी हरेली गेड़ी बांधने तथा घरों के दरवाजों पर नीम की पत्ती या डाली लगाने की परंपरा भी हरेली से जुड़ी है, जिसे सुख-शांति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
-नई पीढ़ी तक पहुंचे लोक परंपराएं : सभापति
सभापति श्याम शर्मा ने कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग बच्चों के लिए बांस से गेड़ी तैयार करते हैं। इस दिन दौड़, कबड्डी, भंवरा, फुगड़ी सहित अनेक पारंपरिक खेल आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रभारी काशीराम कोसरे ने कहा कि किसानों की मान्यता है कि हरेली के दिन खेती के औजारों एवं गोधन की पूजा करने से वर्षभर अच्छी फसल और खुशहाली बनी रहती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से जुड़कर अपने मां के नाम एक पेड़ जरूर लगाएं और उसकी देखभाल कर दुर्ग शहर को हराभरा बनाने में योगदान दें।
कार्यक्रम में पार्षद विद्यावती सिंह, सजान जोसफ, गुलशन साहू, मनीष कोठारी, रंजीता पाटिल, सुरूचि उमरे, सरिता चन्द्राकर, ललिता ठाकुर, सावित्री दमाहे, लोकेश्वरी ठाकुर, खिलावन मटियारा, एल्डरमेन तुलसी यादव, अनूप सोनी, तेखन सिन्हा, मदन बढ़ाई, भाजपा जिला प्रवक्ता अरुण सिंह, मनमोहन शर्मा, कार्यपालन अभियंता मोहम्मद सलीम सिडिकी, सहायक अभियंता गिरीश दीवान, हरिशंकर ठाकुर, दुर्गेश गुप्ता, के.एस. केवलानी, पंकज साहू, विनोद मांझी, सिद्धार्थ साहू एवं उद्यान प्रभारी अनिल सिंह सहित निगम के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
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