
दुर्ग। रविवार को दोपहर 1 बजे दीपाक्षर साहित्य समिति भिलाई दुर्ग के तत्वावधान में पांच कृतियों का विमोचन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। संयुक्त संचालक संभागीय शिक्षा के सभागार मंथन भवन में आयोजित विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ चितरंजन कर भाषाविद् एवं पूर्व विभागाध्यक्ष भाषा अध्ययनशाला पं० रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर थे। अध्यक्षता दुर्ग नगर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रांतीय अध्यक्ष हिन्दी साहित्य भारती बलदाऊ राम साहू ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा राजनांदगाँव उपस्थित थे। मुख्य वक्ता सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं चिन्तक डॉ. इन्द्रबहादुर सिंह मुंबई महाराष्ट्र थे।
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पधारे साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों की गरिमामयी उपस्थिति में पुरूषोत्तम साहू 'दिव्य' एवं डॉ संतराम देशमुख "विमल" की कुल पांच कृतियों का विमोचन मूर्धण्य अतिथियों के हाथों किया गया। प्रथम पुस्तक पुरूषोत्तम साहू "दिव्य" द्वारा रचित" शताब्दियों से गूंजते स्वर ऊँ (हिन्दी काव्य संग्रह) के साथ ही डॉ. संतराम देशमुख "विमल" द्वारा सृजित अन्य चार ग्रंथ कविताएँ कुछ कांटे कुछ फूल (समीक्षा ग्रंथ), कृषक कविताएँ (शोधपरक ग्रंथ), डॉ. दादूलाल जोशी की रचनाधर्मिता चिन्तनपरक ग्रंथ) एवं जिन्दगी का सफर (हिन्दी काव्य संग्रह) शामिल थे। बसंत देशमुख की समकालीन अस्मिता और धरोहर समकालीन दिशा और दृष्टि विमोचन पश्चात् मुख्य अतिथि डॉ. चितरंजन कर ने दोनों साहित्यकारों को बधाई देते हुये कहा- आज इस मंच पर एक साथ पांच ग्रंथों का विमोचन एक सुखद अनुभूति है। पुरुषात्तम साहू "दिव्य" के काव्य संग्रह में संग्रहित कविताएँ विविध विषयों और अनेक रसों से संम्पृक्त है। उनकी रचनाएँ उनके सुदीर्घ जीवन के अनुभवों की गहनता और सामाजिक दायित्वों को अभिव्यक्त करती हैं। सेवानिवृत्ति के पश्चात् उनके द्वारा ग्रंथ का प्रकाशन उनकी सतत् क्रियाशीलता को दर्शाता है। डॉ. संतराम देशमुख विमल के काव्य संग्रह" जिन्दगी का सफर' में संग्रहित कविताएँ मर्मस्पर्शी हैं। विशेष रूप से भाव पक्ष अत्यन्त सबल और गहन है, इसीलिये वह सब सहज सम्प्रेषणीय है। डॉ. विमल की अन्य तीन कृतियाँ अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें ज्ञान का भण्डार है। इनको पढ़ कर उनके एकनिष्ठ परिश्रम का पता चलता है। उनका कृषक अस्मिता और धरोहर समकालीन कविताएँ "एक अनुपम ग्रंथ है।"
मुख्य वक्ता के रूप में मुंबई से पधारे विद्वान समीक्षक डॉ. इन्द्रबहादुर सिंह ने कहा-मैं जब भी छत्तीसगढ़ आता हूँ और यहाँ के साहित्यकारों से मिलता हूँ तो मुझे आत्मिय सुख का अनुभव होता है। इस पावन और रत्नगर्भा धरा में यहाँ के साहित्यकार गंभीर अनुशीलन परक उपयोगी ग्रंथों का लेखन प्रकाशन कर रहे हैं। डॉ. संतराम देशमुख के चार कृतियों का विमोचन इसका प्रमाण है। आज पांच पुस्तकों का विमोचन हुआ है। मेरा विचार है कि विमोचन के पश्चात् इन सभी ग्रंथों पर समीक्षा गोष्ठी होनी चाहिये। समीक्षात्मक चर्चा से ग्रंथों में उल्लेखित महत्वपूर्ण तथ्यों का प्रकटीकरण होता है। इस दिशा में भी प्रयास किया जाना चाहिये।"
विशिष्ट अतिथि डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा ने विमोचित पांचों पुस्तकों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होने सभी पुस्तकों की विशेषताओं को उदाहरण सहित प्रस्तुत किया और कहा कि उनके तीन ग्रंथ 1. बसंत देशमुख की समकालीन कविताएँ- कुछ कांटे, कुछ फूल" 2. कृषक अस्मिता और धरोहर समकालीन कविताएँ तथा 3. डॉ. दादूलाल जोशी की रचनाधर्मिताः दिशा और दृष्टि" शोधर्थियों और अध्येताओं के लिये संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी शाबित होंगे।"
विमोचन समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार बलदाऊराम साहू ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा आज का यह विमोचन समारोह सफल और सार्थक हैं। पुरूषोत्तम साहू "दिव्य" और डॉ. संतराम देशमुख को हार्दिक बधाई देता हूँ। इन सभी पुस्तकों को पढ़कर मैं बहुत अभिभूत हुआ हूँ, खास कर डॉ. संतराम देशमुख 'विमल" के लेखकीय कौशल, और उनके परिश्रम से मैं बहुत प्रभावित हुआ हूँ। विमल जी बहुत बड़े लेखक हैं। मुझे आश्चर्य होता है कि उनका आज तक सही मूल्यांकन नहीं हो पाया है। वह अब तक लगभग 22 ग्रंथों का लेखन प्रकाशन कर चुके हैं। उनका कृषक अस्मिता और धरोहर समकालीन कविताएँ" अद्भुत ग्रंथ है। यह महाविद्यालयीन पाठ्यक्रमों में शामिल करने योग्य है। जैसस कि डॉ. इन्द्र बहादुर सिंह ने सुझाव दिया है कि इन पुस्तकों पर समीक्षा गोष्ठी का आयोजन होना चाहिये तो इस संदर्भ मैं घोषणा करता हूँ कि आप जब कहें, रायपुर के वृन्दावन हॉल में डॉ. संतराम देशमुख "विमल" की कृतियों पर चर्चा गोष्ठी का आयोजन की व्यवस्था कर सकता हूँ।"
विमोचन कार्यक्रम का प्रभावी संचालन दीपाक्षर साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. दादूलाल जोशी ने किया तथा आभार ज्ञापन पुरुषोत्तम साहू" दिव्य" ने दिया। कार्यक्रम के प्रारंभमें समिति के संस्थापक डॉ. संतराम देशमुख" विमल" ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। समारोह में लोक मंच के कलाकारों ने अपने गायन और वादन से पूरे माहौल को रसमय बना दिया।
समारोह में विद्वान डॉ. गिरिजा शंकर गौतम जी रायपुर की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय है। इस अवसर पर रमेश यादव, कृष्ण कुमार दीप, माखन लाल साहू (पेण्ड्री, जिला- बालोद), नीलेश अनन्त (रायपुर), चन्द्रकान्त साहू (महामंत्री, हिन्दी साहित्य भारती), चन्द्रिका प्रसाद देशमुख (अध्यक्ष शारदा साहित्य समिति निकुम), प्यारेलाल देशमुख (निकुम), कैलाश कुमार साहू (बम्हनी), राजकुमार चौधरी (टेड़ेसरा, राजनांदगाँव), डॉ. राघवेन्द्र कुमार "राज" (अध्यक्ष स्नेहिल साहित्य समिति जेवरा, सिरसा), सुभन मोहाडे (मुबई), जोहनलाल साहू (कोहका), उमाशंकर साहू (जेवरा), राजेश साहू (धनोरा), साक्षीगोपाल साहू (भिलाई), घनाराम साहू (भिलाई), तुलसी राम देशमुख, श्यामसुन्दर गजपाल, गोविन्द साहू, श्रीमती नंदा देशमुख, कु० ओशी देशमुख, श्रीमती फणिषा साहू (भिलाई), सुभद्रा देवी साहू (कोहका), श्रीमती माधुरी कर (रायपुर), हितिषा साहू, द्रौपदी साहू आदि साहित्यकार एवं बद्धिजीवी उपस्थित थे।
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