होम / बड़ी ख़बरें / साइबर ठगी में इस्तेमाल 26 म्यूल बैंक खाताधारक गिरफ्तार, भिलाई नगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
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दुर्ग। साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में भिलाई नगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी में प्रयुक्त 26 म्यूल (लेयर-1) बैंक खाताधारकों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना भिलाई नगर में अपराध क्रमांक 388/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3), 318(4) एवं 3(5) के तहत कार्रवाई की है।
पुलिस के अनुसार, पुलिस मुख्यालय तकनीकी सेवा (साइबर) के निर्देश पर 21 अप्रैल 2026 से थाना भिलाई नगर क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक के संदिग्ध खातों की जांच की जा रही थी। जांच में सामने आया कि इन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम सीधे जमा की गई थी। वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर करने और नकद निकासी के प्रमाण भी मिले।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि खाताधारकों ने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल सिम और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधाएं अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराईं, जिनका उपयोग साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे छिपाने और आगे स्थानांतरित करने के लिए किया। पुलिस का कहना है कि इन माध्यमों से अपराधियों ने अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों से बैंक खातों का विवरण, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, बैंकिंग दस्तावेज तथा अन्य डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है और साइबर ठगी के मास्टरमाइंड सहित अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की राशि प्राप्त करने और उसे विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। कई मामलों में खाताधारक लालच या कमीशन के बदले अपने खाते अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं, जिससे वे भी अपराध में सहभागी बन जाते हैं।
-दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल सिम, ओटीपी अथवा इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी भी व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते में राशि प्राप्त कर उसे आगे ट्रांसफर करना भी कानूनन अपराध हो सकता है। साइबर ठगी की किसी भी घटना की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस थाने में दें।
संपादक- पवन देवांगन
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सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
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