रायपुर। छत्तीसगढ़ की शासकीय शालाओं में मंत्र एवं प्रार्थना संबंधी राज्य शासन के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को आज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। यह याचिका छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलाम रिज़वी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें 12 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी मंत्र एवं प्रार्थना संबंधी आदेश को निरस्त करने की मांग की गई थी।याचिका में दावा किया गया था कि विद्यालयों में मंत्रोच्चार का आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई माननीय उच्च न्यायालय की एकलपीठ में हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने याचिका को खारिज कर राज्य शासन के आदेश को बरकरार रखा।
इस निर्णय का स्वागत करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि यह फैसला राज्य सरकार के उस दृष्टिकोण की पुष्टि करता है, जिसके तहत शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्य, सकारात्मक सोच, राष्ट्रभावना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्तापूर्ण सुधारों के साथ-साथ मूल्यपरक शिक्षा को भी समान महत्व दे रही है। विद्यालयों में प्रार्थना और मंत्रोच्चार का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और संस्कारों का विकास करना है।
श्री यादव ने कहा कि उच्च न्यायालय के इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य सरकार की पहल को कानूनी मजबूती मिली है और विद्यालयों में मूल्यपरक एवं संस्कारयुक्त शिक्षा को आगे बढ़ाने के प्रयासों को नया बल मिलेगा। राज्य सरकार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के अपने संकल्प के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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