दुर्ग

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बाल संरक्षण संस्थानों का किया निरीक्षण

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-बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास पर दिया विशेष जोर

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दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आज महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शासकीय बालगृह, बाल खुला आश्रय गृह, सेवा भारती मातृछाया बोरसी, सम्प्रेक्षण गृह पुलगांव एवं प्लेस ऑफ सेफ्टी (बालक) का भ्रमण कर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भोजन एवं पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सभी संस्थानों में बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सबसे पहले कलेक्टर श्री सिंह शासकीय बालगृह पहुंचे, जहां वर्तमान में 16 बच्चे निवासरत हैं। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनकी दिनचर्या, पढ़ाई और खान-पान की जानकारी ली। बच्चों के शैक्षणिक स्तर का आकलन करने के लिए उन्होंने गणित के जोड़-घटाव से जुड़े प्रश्न भी पूछे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधीक्षक को निर्देशित किया कि प्रत्येक बच्चे का उसकी आयु के अनुरूप विद्यालय में प्रवेश कराया जाए तथा अध्ययन सामग्री एवं पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। उन्होंने बालगृह में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नियमित शैक्षणिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने को कहा।
        इसके बाद कलेक्टर श्री सिंह ने बाल खुला आश्रय गृह का निरीक्षण किया, जहां सात बच्चे रह रहे हैं। उन्होंने सभी बच्चों की नियमित काउंसिलिंग कराने और उनके पुनर्वास की दिशा में प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि सात में से पांच बच्चों को बिहार से एक ठेकेदार द्वारा फैक्ट्री में काम कराने के उद्देश्य से लाया गया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को संबंधित ठेकेदार एवं फैक्ट्री प्रबंधन के विरुद्ध बाल संरक्षण कानूनों के तहत तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के क्रम में कलेक्टर श्री सिंह सेवा भारती मातृछाया बोरसी भी पहुंचे। यहां उन्होंने नवजात एवं छोटे बच्चों की देखभाल की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। संस्थान में छह केयर टेकर बच्चों की देखरेख कर रहे हैं। कलेक्टर ने यहां की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए बच्चों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
       इसके पश्चात उन्होंने पुलगांव स्थित सम्प्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया। यहां वर्तमान में 38 किशोर रह रहे हैं, सम्प्रेक्षण गृह में किसी अपराध में शामिल पाए गए 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जेल भेजने के बजाय एक सुरक्षित और सुधारात्मक वातावरण में रखकर उनका पुनर्वास करना है। बच्चों को अपराधी बनने से रोकना, उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति में सुधार करना है। कलेक्टर ने बच्चों से संवाद कर भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर पुलगांव स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी (बालक) का भी जायजा लिया। यहां 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के गंभीर अपराधों में संलिप्त किशोरों को पृथक रूप से रखा जाता है। वर्तमान में यहां 38 किशोर रह रहे हैं। कलेक्टर ने संस्थान की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के साथ ही स्टॉक पंजी का अवलोकन किया और आवश्यक अभिलेखों के सुव्यवस्थित संधारण के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी आर.के. जाम्बुलकर, परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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