दुर्ग। पासपोर्ट सेवा केंद्र का नाम आते ही आम नागरिक के मन में एक सुव्यवस्थित, स्वच्छ, पर्याप्त प्रकाश एवं वेंटिलेशन से युक्त कार्यालय की छवि उभरती है, जहाँ नागरिकों को सहज और सम्मानजनक वातावरण में सेवाएँ प्राप्त हों। किंतु दुर्ग शहर स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र में आने वाले अनेक आवेदकों का अनुभव इससे भिन्न दिखाई देता है।
जानकारी के अनुसार, केंद्र का संचालन सीमित संसाधनों एवं कर्मचारियों के माध्यम से किया जा रहा है। लगभग 20×20 फीट के पुराने कमरे में कार्यालय संचालित हो रहा है, जहाँ उपलब्ध स्थान का एक बड़ा हिस्सा पुराने एवं अनुपयोगी फर्नीचर से घिरा हुआ है। परिणामस्वरूप आवेदकों के लिए पर्याप्त प्रतीक्षालय अथवा बैठने की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
आवेदकों का कहना है कि प्रातः 10 बजे के एक ही समय स्लॉट में 25 से 50 लोगों को बुला लिया जाता है, जबकि भीड़ प्रबंधन के लिए टोकन व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण लोगों के घंटों खराब हो रहे हैं ,कार्यालय के बाहर भी स्थिति असुविधाजनक बनी रहती है। समीप स्थित क्षेत्र में बड़ी मात्रा में कागजात, फॉर्म एवं अन्य दस्तावेज बिखरे रहने के कारण नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इसमें से कई तो वह दस्तावेज भी है जो गलत हाथ में पड़ने से किसी का नुकसान भी करा सकते हैं।
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कई आवेदकों की यह भी शिकायत की है कि आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में पर्याप्त एवं स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज लाने के लिए पुनः लौटना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, आधार कार्ड की पूर्ण आकार (फुल साइज) प्रति प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है, जबकि ऐसी आवश्यकता का स्पष्ट उल्लेख कई आवेदकों को उपलब्ध जानकारी में नहीं मिला।
इसके अतिरिक्त, पासपोर्ट हेतु फोटो खींचने की प्रक्रिया के दौरान भी आवेदकों को तैयारी का समय न मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। इन परिस्थितियों के कारण नागरिकों को समय, श्रम एवं संसाधनों की अनावश्यक हानि उठानी पड़ रही है।
नागरिकों ने संबंधित विभाग एवं प्रशासन से अनुरोध किया है कि दुर्ग पासपोर्ट सेवा केंद्र की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएँ, जिससे आम जनता को बेहतर, व्यवस्थित एवं सम्मानजनक सेवाएँ उपलब्ध हो सकें।
संपादक- पवन देवांगन
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