दुर्ग

चिकारा की धुन से बेलमेटल की खनक तक, परंपरागत लोक वाद्य बना रहे सिद्ध कलाकार

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-कुहुकी कला ग्राम मरोदा सेक्टर में 10 दिवसीय लोक वाद्य कार्यशाला जारी

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भिलाई। छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग के सहयोग से 10 दिवसीय लोक वाद्य कार्यशाला शिविर संग्रहालय परिसर कुहुकी कला ग्राम मरोदा सेक्टर मैत्री बाग चौक के बाजू में 14 जून से 23 जून तक जारी है। विगत 23 वर्ष से जारी इस शिविर में छत्तीसगढ़ अंचल के दूर-दराज से आए कलाकार न सिर्फ अपनी कलाकृतियों और वाद्य यंत्रों का निर्माण कर रहे हैं बल्कि एक दूसरे की कला को सीख भी रहे हैं। वहीं आगंतुक भी अपनी आंखों के सामने बनते वाद्य यंत्र व कलाकृतियां देख मंत्रमुग्ध है। यहां चिकारा, खंजेरी, तंबूरा, गतका, तुरही, चरहे, चिटकुली, कुहुकी और रूंजु सहित तमाम शिल्प से आगंतुक रूबरू हो रहे हैं। 
 शिविर के संयोजक व प्रख्यात लोकवाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय ने बताया कि उनके यहां वर्ष 2003 से यह 10 दिवसीय शिविर हर वर्ष मानसून आगमन के पहले गर्मियों में लगता रहा है। शुरूआती 4 वर्ष उन्होंने स्वयं की पहल से कलाकारों/शिल्पकारों को बुलाकर ऐसा शिविर आयोजित किया था लेकिन बाद में छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग ने पहल की और तब से शिविर हर साल आयोजित हो रहा है। 

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रिखी ने बताया कि शिविर की वजह से शिल्पकारों को बाजार मिल रहा है, वहीं सभी को एक दूसरे की कला सीखने का अवसर भी मिल रहा है। इससे शिल्पकार अपनी-अपनी कला में निखार ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 14 जून से शुरू हुई कार्यशाला में रोजाना सुबह 7:00 बजे से 11:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से 7:30 बजे तक कार्य चलता है। पूरी तरह नि:शुल्क इस कार्यशाला में कलाप्रेमी पहुंच कर कलाकृतियां बनते हुए प्रत्यक्ष देख सकते हैं। वहीं समापन अवसर पर 23 जून की शाम रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा। उन्होंने बताया कि शिविर के व्यवस्थित संचालन के लिए टीम से भोजन व्यवस्था अन्नपूर्णा क्षत्रिय,भोज,जनसंपर्क में गायक कुलदीप सार्वा, अजय उमरे, दिनेश वर्मा, राजेश साहू,नवीन साहू, संजू,नेहा, जया और अनुराधा का विशिष्ट योगदान है।

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-तैयार हो रहे हैं परंपरागत व दुर्लभ वाद्य
शिविर में आसपास और दूर-दराज के अंचल के अलग-अलग गांव से पहुंचे शिल्पकार परंपरागत वाद्य यंत्र तैयार कर रहे हैं। कोलिहापुरी दुर्ग से आए मनहरण दास बंजारे चिकारा बजाने में प्रवीण है और खुद चिकारा बनाते भी हैं। ग्राम दहिकोंगा कोंडागांव से शिबू कश्यप बेल मेटल से तुरही बनाने का कार्य कर रहे हैं। बेल मेटल शिल्प को बनिया पारा कोंडागांव से शिबू कश्यप आकार दे रहे हैं। लौह शिल्प में ग्राम दहीकोंगा से रामदास, मिट्टी शिल्प में मरारपारा कोंडागांव से डमरु चक्रधारी, काष्ठ कला में दीपक तारम लोहारा, बिजेलाल, राजनांदगांव जिले से पन्ना लाल डोंगरगढ़ से, रुंझू के लिए गाड़ाडीह से नंद कुमार देवार, डोरे लाल, और तंबूरा निर्माण के लिए रामकुमार पाटिल रनचिरई से आकर यहां कार्यशाला में शामिल हुए हैं।

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