दुर्ग

परमात्म ज्ञान सुनने का अर्थ है उसको आचरण में लाना, हर दिन देखना कि मेरे में दिव्यता कितनी आई है: हेमलता दीदी

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-ब्रह्माकुमारीज "आनंद सरोवर" बघेरा में आध्यात्मिक समागम
-ब्रह्माकुमारीज के क्षेत्रीय निर्देशिका हेमलता दीदी का शुभागमन
-पूर्व संस्कारों के वश मेरे बोल व कर्म से किसी को दुःख न हो यह ध्यान रखना है ।
-परमात्मा द्वारा दिए गए ज्ञान का मुख्य सार है स्वयं को आत्मा निश्चय कर हर कर्म करना 

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दुर्ग। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बघेरा स्थित "आनंद सरोवर" में छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश की क्षेत्रीय निर्देशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी का शुभागमन हुआ l उनके सानिध्य में सभी भाई बहनों के आध्यात्मिक उन्नति लिए सुंदर आध्यात्मिक समागम हुआ l ब्रह्माकुमारी दुर्ग की संचालिका रीटा दीदी ने हेमलता दीदी के स्वागत में कहा कि आपके निर्देशन में सभी स्थान के भाई-बहनों को समय प्रति समय आपके अनुभव युक्त मार्गदर्शन मिलते रहते हैं । आप अपनी तपस्या व कुशाग्र बुद्धि के बल से मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ (इन्दौर जोन) को ब्रह्माकुमारीज के इतने सेवाकेन्द्रों में अनेक बातों पर अपनी विशिष्ट पहचान दिलायी, यह आपके कुशल नेतृत्व की ही प्रमाण है। इस अवसर पर कुमारी तेजस्वी,प्रियांशी,युक्ति, चंद्राणी द्वारा स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया ।
                    उल्लेखनीय है कि जून मास को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रथम मुख्य संचालिका ओम राधे (मम्मा) के पुण्य स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है । इस मास में विशेष आध्यात्मिक उन्नति के लिए आंतरिक तपस्या के भिन्न-भिन्न आयोजन किए जाते हैं । इसी श्रृंखला में हेमलता दीदी ने आध्यात्मिक पुरुषार्थ की छोटी-छोटी बातों पर अपना उदबोधन दिया । उन्होंने कहा छोटी-मोटी कमियां किसी की देखने से हमारे अंदर उसके प्रति भाव बदल जाता है, भावना बदल जाती है और जब भाव बदला, भावना बदली पहले क्या बदलेंगी, दृष्टि बदलेगी। पहले हमारा किसी के साथ बहुत अच्छा संबंध था लेकिन किसी ने उसके बारे में मेरे को कोई छोटी सी नेगेटिव बात बता दिया आप उससे इतना अच्छा संबंध रखते हो वह तो आपके लिए ऐसा बोलते हैं अब हमने यह भी नहीं जानने की कोशिश की सचमुच में भी उसने ऐसा बोला भी है या कि नहीं ।

जिसके साथ आपका बहुत अच्छा संबंध है और कोई उसके लिए आकर ऐसा बोल दे तो उसके प्रति आपकी दृष्टि बदल जाती है या नहीं ? वही व्यक्ति आपके पास आता है तो आप उसे शंका की दृष्टि से देखते हो उसकी हर एक्ट पर आप वही जो आपको बोला गया है आप उसे उसी नजरिया से देखने की कोशिश करते हैं तो आप सोचो छोटी सी नेगेटिव बात ने मेरी दृष्टि को मेरे दृष्टिकोण को मेरे व्यवहार को कितना बदल दिया। पहले जिससे जितना प्यार से सम्मान से बात करते थे अब करेंगे ? क्यों नहीं करेंगे?छोटी सी तो नेगेटिव बात थी, लेकिन वह नेगेटिव बात ने मेरे मन को भी उसके प्रति नेगेटिव बना दिया तो हर चीज नेगेटिव हो जाती है भले वह है नहीं l इसलिए सुनी सुनाई बातों पर कभी भी विश्वास नहीं करो l
            अभी आंतरिक तपस्या हम कर रहे हैं स्वयं को इतना शांत बना सकते हैं कि कोई कुछ भी उल्टा करें मेरा मन हलचल में नहीं आएगा l मेरे मन में व्यर्थ संकल्प नहीं चलेंगे मेरा मन हर परिस्थिति में कोई भी बात आए तो भी एकदम शांत रहेगा क्योंकि मेरा स्वधर्म ही शांत स्वरूप है, आत्मा का स्वधर्म शांति है इसे महसूस कर स्वयं को परिवर्तन करना है l 
         काव्यमय मंच संचालन में ब्रह्माकुमारीज में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली रूपाली दीदी ने हेमलता दीदी के साथ के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि आज ब्रह्माकुमारीज का भिन्न-भिन्न स्थानों में इतना व्यापक विस्तार हो रहा है । दीदी के निर्देशन में ही रायपुर स्थित ब्रह्माकुमारीज के "शांति शिखर" के उद्घाटन में स्वयं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आगमन हुआ । यह सब दीदी के दृढ़ इच्छा शक्ति व तपस्या का फल है।

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