दुर्ग। दुर्ग जिले में सीमांकन एवं रकबा बैठाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक भू-स्वामी ने राजस्व विभाग के आरआई विजय शर्मा पर विवादित सीमांकन प्रकरणों में कथित रूप से पैसों की मांग करने, पक्षपातपूर्ण टीम गठन कराने तथा राजनीतिक प्रभाव में कार्य करने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले को राजस्व व्यवस्था की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल बताते हुए विस्तृत जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्तमान में विवादित सीमांकन प्रकरणों को जानबूझकर जटिल बताते हुए “टीम फॉर्मेशन” की आवश्यकता बताई जाती है और फिर कथित रूप से रुपए की मांग की जाती है। आरोप है कि टीम में अपने पसंदीदा लोगों को शामिल कर सीमांकन एवं रकबा बैठाने की कार्रवाई प्रभावित की जाती है तथा पैसे देने वालों के पक्ष में रिपोर्ट तैयार की जाती है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में आरआई विजय शर्मा की प्रमुख भूमिका है और वे अधिकांश विवादित सीमांकन प्रकरणों में दल गठन से जुड़े रहते हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उनके पास ऐसे कई मामलों से संबंधित दस्तावेज हैं, जिनका आने वाले समय में खुलासा किया जाएगा।
वर्ष 2005 में खरीदी थी भूमि ...
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2005 में पवन अग्रवाल से खसरा नंबर 80/3 की कुल 0.417 हेक्टेयर भूमि क्रय की थी। इसी खसरा नंबर से वर्ष 1994 से 2005 के बीच कई अन्य लोगों को भी भूमि विक्रय की गई थी।
उनके अनुसार, विक्रय की गई भूमि के बीच आवागमन के लिए पवन अग्रवाल द्वारा 30 फीट एवं 60 फीट चौड़ी सड़क छोड़ी गई थी, जिसका उपयोग आज भी स्थानीय रहवासी कर रहे हैं। हालांकि, उक्त सड़क-रास्ते का रकबा अब तक मूल खसरा नंबर 80/3 में ही दर्ज है।
सड़क की भूमि को दूसरे खसरे में समायोजित करने का आरोप ...
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अब पवन अग्रवाल के पुत्र निलेश अग्रवाल, जो वार्ड क्रमांक 06 से पार्षद एवं एमआईसी सदस्य हैं, अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए सड़क-रास्ते की भूमि को उनकी भूमि खसरा नंबर 80/352 में समायोजित कराने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि खसरा नंबर 80/3 से जुड़े कई नामांतरण प्रकरणों में स्वयं पवन अग्रवाल द्वारा तहसीलदार के समक्ष यह स्वीकार किया जा चुका है कि बची हुई भूमि सड़क-रास्ते की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस संबंध में तहसीलदार के आदेशों में भी उल्लेख मौजूद है। इसके बावजूद अब उसी भूमि को उनकी निजी भूमि में समायोजित करने का प्रयास किया जा रहा है।
25 लाख रुपए मांगने का आरोप ...
शिकायतकर्ता ने आरआई विजय शर्मा पर 25 लाख रुपए मांगने का गंभीर आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि कार्य दस्तावेज एवं तथ्यों के आधार पर किया जाए, लेकिन कथित तौर पर उन्हें कहा गया कि “काम उसी के फेवर में होगा जो पैसे देगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियां लंबे समय तक स्वीकार नहीं की गईं तथा रिसीविंग देने से भी इंकार किया गया। बाद में उन्होंने व्हाट्सएप के माध्यम से भी आपत्ति भेजी, लेकिन तब भी उन्हें विधिवत प्राप्ति नहीं दी गई।
सीमांकन से पहले मुलाकात का भी आरोप ...
शिकायतकर्ता के अनुसार, 14 मई 2026 की रात पटेल चौक स्थित पोस्ट ऑफिस के पास आरआई विजय शर्मा एवं पुलगांव पटवारी को निलेश अग्रवाल के साथ देखा गया। उन्होंने दावा किया कि गणेश तिवारी नामक व्यक्ति ने भी उन्हें वहां देखा था। आरोप है कि गणेश तिवारी को देखते ही आरआई विजय शर्मा वहां से चले गए। उल्लेखनीय है कि अगले ही दिन 15 मई 2026 को सीमांकन की तारीख निर्धारित थी।
शिकायतकर्ता रजत सुराना का कहना है कि सीमांकन से ठीक पहले इस प्रकार की मुलाकात पूरे मामले में मिलीभगत एवं पक्षपात की आशंका को मजबूत करती है।
निष्पक्ष जांच की मांग ...
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कई भू-स्वामियों की भूमि राजनीतिक दबाव और भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ सकती है।
फिलहाल मामले को लेकर संबंधित राजस्व अधिकारियों एवं पक्षकारों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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