-जीएसआर 220 एवं 817 निरस्त करने और अवैध ऑनलाईन दवा विक्रय पर की नियंत्रण की मांग
दुर्ग। छत्तीसगढ़ केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश में दवा दुकानों पर पुलिस बल की उपस्थिति में की जा रही संयुक्त जांच प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। संगठन ने इसे औषधि व्यवसायियों के सम्मान और मनोबल के विपरीत बताते हुए कहा कि इससे व्यापारिक वातावरण में भय और असमंजस की स्थिति बन रही है। एसोसिएशन के प्रदेश सचिव अविनाश अग्रवाल और उपाध्यक्ष राजेश कुमार साहू ने मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन के माध्यम से बताया कि प्रदेश में 18 हजार से अधिक लाइसेंसधारी दवा विक्रेता और 40 हजार से ज्यादा प्रशिक्षित फार्मासिस्ट कार्यरत हैं, जो शहरी से लेकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। कई स्थानों पर ये फार्मासिस्ट प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी के रूप में भी काम करते हैं। उन्होने कहा कि राज्य में पहले से ही पर्याप्त संख्या में औषधि निरीक्षक और संबंधित अधिकारी उपलब्ध हैं, जो नियमित रूप से जांच करते हैं। ऐसे में पुलिस की मौजूदगी में अलग से संयुक्त कार्रवाई करने से अनावश्यक दबाव और भय का माहौल बन रहा है, जिससे दवा आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा उन्होने जीएसआर 220 एवं 817 निरस्त करने और अवैध ऑनलाईन दवा विक्रय पर नियंत्रण की प्राथमिकता से मांग की है। श्री अग्रवाल और श्री साहू ने बताया कि एसोसिएशन ने जीएसआर 220 और जीएसआर 817 को भी निरस्त करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों के कारण वैध दवा व्यवसायियों को प्रशासनिक जटिलताओं और व्यापार संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रदेश में नशे से जुड़े मामलों में ऑनलाइन माध्यमों से दवाओं की अवैध आपूर्ति की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। संगठन ने सरकार से अपील की है कि वैध दुकानों पर दबाव बनाने के बजाय ऑनलाइन अवैध दवा विक्रय पर कठोर नियंत्रण किया जाए। एसोसिएशन के प्रदेश सचिव अविनाश अग्रवाल और उपाध्यक्ष राजेश कुमार साहू ने कहा कि दवा विक्रेता हमेशा शासन-प्रशासन के साथ सहयोगात्मक भूमिका निभाता आए है और कोविड-19 जैसे संकट काल में भी सक्रिय सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या जांच की आवश्यकता हो, तो विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत औषधि निरीक्षकों द्वारा ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
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