दुर्ग। दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष वीर विक्रम यादव से भिलाई- दुर्ग के औद्योगिक क्लस्टर में वायु एवं जल प्रदूषण की गंभीर समस्या पर संज्ञान लेने की मांग किया है। डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि भिलाई-दुर्ग औद्योगिक क्लस्टर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित होने के बावजूद वायु और जल प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। भिलाई स्टील प्लांट, फेरो-अलॉय, स्पॉन्ज आयरन, सीमेंट और अन्य भारी उद्योगों के कारण PM10 और PM2.5 का स्तर अक्सर राष्ट्रीय मानकों से अधिक रहता है। कोयला परिवहन,सड़क धूल और औद्योगिक उत्सर्जन भी मुख्य कारण हैं।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि जीवनदायिनी शिवनाथ नदी आज सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट से बुरी तरह दूषित हो चुकी है। नदी में अनुपचारित गंदा पानी गिरने से पीने के पानी के स्रोत,कृषि और मछली पालन प्रभावित हो रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जनवरी 2026 में स्पष्ट आदेश दिए थे कि शिवनाथ नदी में मिलने वाले दोनों मुख्य ड्रेन पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण 6 महीने के अंदर पूरा किया जाए,लेकिन निर्माण में अनावश्यक देरी हो रही है।भूजल प्रदूषण की समस्या भी गंभीर है। भारी उद्योगों से आयरन,नाइट्रेट और अन्य भारी धातुओं की सांद्रता बढ़ रही है तथा अत्यधिक निकासी से जल स्तर तेजी से गिर रहा है।इससे स्थानीय निवासियों में श्वसन रोग,त्वचा संबंधी बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं और पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने केंद्र की मोदी सरकार की पर्यावरण संरक्षण नीतियों और छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।लेकिन भिलाई-दुर्ग जैसे औद्योगिक हब में प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी पूरी तरह निभाया जाना आवश्यक है।उन्होंने मांग किया है कि सभी उद्योगों में ई एसपी,बैग फिल्टर, वेट स्क्रबर जैसे प्रदूषण नियंत्रण उपकरण अनिवार्य करें और नियमित ऑडिट कराएं। कोयला परिवहन पर कवर सिस्टम और सड़क धूल दमन को प्रभावी बनाएं।उद्योगों और आवासीय क्षेत्रों के बीच बफर जोन तथा ग्रीन बेल्ट विकसित करें।एनजीटी के जनवरी 2026 आदेश के अनुसार शिवनाथ नदी पर दोनों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण तीन महीने के अंदर पूरा करें और अंतरिम उपचार व्यवस्था तुरंत लागू करें।नदी किनारे निगरानी समिति गठित करें जिसमें स्थानीय नागरिक प्रतिनिधि शामिल हो।एनसीएपी फंड का शेष राशि का पूर्ण उपयोग करें और स्रोत अपोर्शनमेंट स्टडी के आधार पर ठोस एक्शन प्लान लागू करें।भूजल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करें और ओवर-एक्सट्रैक्शन पर सख्ती बरतें।
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