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दुर्ग। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विद्यालय के बघेरा स्थित आनंद सरोवर के "कमला दीदी सभागार" में ब्रह्माकुमारीज की मुख्य प्रशासिका दादी रतन मोहिनी की प्रथम पुण्यतिथि का आयोजन किया गया।
उल्लेखनीय है समग्र विश्व में ब्रह्माकुमारी संस्था विश्व में ऐसी अनुपम है जहाँ के संचालन का समस्त दायित्व माताओं बहनों के हाथों में है। दादी रतन मोहिनी के जीवन यात्रा के विषय में रीटा दीदी संचालिका, ब्रह्माकुमारीज दुर्ग ने बताया दादी रतनमोहिनी जी का जन्म 25 मार्च, 1925 को सिंध, पाकिस्तान में हुआ था। मात्र 13 साल की उम्र में वे ब्रह्माकुमारीज से जुड़ गईं और 87 वर्षों तक इस संस्था की यात्रा की साक्षी रहीं। उन्होंने अपने जीवन को अध्यात्म, सेवा और सशक्तिकरण के मार्ग पर समर्पित किया।
दादी जी की विशेषताएं ...
- सादगी और स्नेह: दादी जी का जीवन सादगी और स्नेह से भरा था, जो उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाता था।
- आध्यात्मिक ज्ञान- उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए काम किया, जिससे लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने में मदद मिली।
- नारी सशक्तिकरण-वे नारी सशक्तिकरण की एक मजबूत आवाज थीं, जिन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने के लिए काम किया।
- समाज सेवा-उन्होंने समाज सेवा के लिए कई कदम उठाए, जिसमें युवा प्रभाग का नेतृत्व भी शामिल है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आया।
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दादी जी की प्रेरणा ..
दादी रतनमोहिनी जी की प्रेरणा से अनेकों लोगों ने अपना जीवन बदल लिया। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज के वैश्विक आंदोलन को उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया और उनकी शिक्षाएं लोगों को अध्यात्म के मार्ग पर चलने और जन-कल्याण-कार्यों के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
इस आयोजन में ललित सेक्सरिया- (अध्यक्ष अग्रवाल समाज ),पायल अग्रवाल (समाज सेविका दुर्ग ) ने दादी जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि दादीजी अध्यात्म की जरिए शिखर पर पहुंची है और अनेकों का प्रेरणा स्रोत बनी हैं तो वास्तविक श्रद्धांजलि यही है कि हम उनके बताए हुए अध्यात्म के मार्ग का अनुसरण करें । इस आयोजन में ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र से अनेक भाई-बहनें उपस्थित हुए मंच संचालन ब्रह्माकुमारी रूपाली दीदी ने किया।
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