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शादी की 50वीं सालगिरह पर, देवांगन दंपति ने अपने शरीर को दान करने की घोषणा की

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भिलाई नगर। सनातन संस्कृति में दान को सर्वोच्‍च कार्य माना गया है, जो न केवल मन को शुद्धि प्रदान करती है बल्की निःस्वार्थ भाव से दुसरों की मदद की भावना जगाती है। दान वास्तु का त्याग नहीं बल्कि करुणा और आत्मा का विस्तार है। ऐसी भावना से अभिभूत होकर मैत्री विहार भिलाई के समाज सेवी पुरानिक राम देवांगन और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती देवयानी देवांगन ने 8 मार्च 2026 को अपने दाम्पत्य जीवन की स्वर्ण जयंती (50 वी) वर्षगाँठ मनाया। इस अवसर पर दोनों ने शरीर दान करने की घोषणा की है। पुरानिक राम देवांगन ने चर्चा में कहा कि मृत्यु के बाद हम अपने शरीर को राख और मिट्टी के रूप में व्यर्थ कर देते हैं, इसके बजाय हमें इसे समाज सेवा में समर्पित करना चाहिए ताकी देहदान से मृत्यु के बाद इसे प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए चिकित्सा विभाग को सौंपने से, भावी नए डॉक्टरों को सहायक होकर मानवता के लिए हमारा देह कल्याणकारी हो। देवांगन दंपति का कहना है कि हमारा शरीर ईश्वर का एक अनूठा उपहार है, और हम सौभाग्यशाली हैं कि यह लोक कल्याण के उपयोग आ सकती है।
इस अवसर पर विशेष अतिथि अरुण वोरा, पूर्व विधायक दुर्ग ने कहा कि जैसे वृक्ष अपना सर्वस्व दान दे देता है उसी तरह आज पुरानिक देवांगन और श्रीमती देवयानी देवांगन ने देहदान की घोषणा कर मानवता की दिशा में दधीचि के समान आदर्श प्रस्तुत किया है। निसंदेह उनका त्याग समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनेगी। चिकित्सा विभाग से उपस्थित अधिकारी अजय सिंह राजपूत ने प्रमाण पत्र प्रदान करते हुये पुरानिक  देवांगन और देवयानी देवांगन की भूरि भूरि प्रशंसा की और कहा यह दान मेडिकल छात्रों की शिक्षा, नई शल्य चिकित्सा, तकनीकी विकास एवं शोध में सहायक होता है। यह निःस्वार्थ नेकी का काम है, जो जिंदगी बाद भी भला करता है। विशिष्ट अतिथि रिकेश सेन विधायक वैशाली नगर ने इस देहदान को समाज के लिए अनुकरणीय आदर्श बताया।  दुर्ग के पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल ने देवांगन दम्पत्ति के देहदान को महादान बताया। 

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ज्ञातव्य हो कि पुरानिक राम देवांगन पाटन नगर के स्व. कलीराम देवांगन के ज्येष्ठ पुत्र हैं। वे अपनी शिक्षा दीक्षा उपरांत मेकॉन इंडिया में सेवा कर, सेवनिवृत्त हुए हैं। उन्होंने सेवा को अपना परम कर्तव्य मानते हुए देवांगन समाज को संगठित करने का संकल्पित प्रयास किया, वे सामाजिक कुरीतियों को दूर कर समाज में व्याप्त विषमताओं को मिटाने  का पहल किया।  वर्तमान में पुरानिक राम देवांगन, दुर्ग जिला देवांगन समाज के अध्यक्ष हैं।उनके द्वारा दुर्ग नगर में वर्ष 2022 में श्रीमद्भागवत कथा का  तथा 2024 में शिव महापुराण कथा का भव्य ऐतिहासिक आयोजन किया था । अनौपचारिक चर्चा में उन्हें यह प्रेरणा कैसे मिली, पूछने पर बताया, प्रगट चार पद धर्म के, कलि महु एक प्रधान। जेन देह विधि दिन्हे,  दान करई कल्याण।।  धर्म के चार चरण ( सत्य, दया, तप और दान) प्रसिद्ध हैं, जिनमें से कलिकाल में एक दानरूपी चरण ही प्रधान हैं. शरीर में आसक्ति न रखते हुए, इसे ईश्वर की भेंट मानकर उपयोग करने में ही मानव जीवन की सार्थकता है।  वैवाहिक जीवन के 50 वर्ष के समय का स्मरण करते हुये हर कदम पर अपनी सहधर्मिणी के सहयोग को सराहा.
इस आयोजन में उपस्थित समाज सेवियों में भूषण देवांगन दुर्ग, प्रेमचंद देवांगन नेहरूनगर, शंकरलाल देवांगन भिलाई,   खेमलाल देवांगन मोहलाई, व्यासनारायण देवांगन पाटन, राजेंद्र लिमजे, सोहनलाल देवांगन, यादराम देवांगन, भेदूराम देवांगन, मंगतू राम देवांगन, कमलेश देवांगन, ईश्वर सोनी दुर्ग, खुमान सिंह, मेकॉन के पुराने सहकर्मी, पारिवारिक सदस्य और ईष्ट मित्र उपस्थित थे।

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