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बस्तर की बेटी इशिका बनी युवाओं के लिए प्रेरणा, 19 साल की उम्र में शुरू किया आर्ट-क्राफ्ट का सफर, अब विदेशों तक पहुंचा हुनर

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जगदलपुर/दुर्ग। अगर मेहनत और जुनून सच्चा हो तो छोटे शहर से भी बड़ी पहचान बनाई जा सकती है। बस्तर की बेटी इशिका जैन ने अपनी लगन और रचनात्मकता से यही साबित कर दिखाया है। महज 19 साल की उम्र में कोविड काल के दौरान शुरू किया गया उनका छोटा सा आर्ट एंड क्राफ्ट काम आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है।
इशिका अपने यूनिक और क्रिएटिव आइडियाज से शादी की पैकेजिंग, रिटर्न गिफ्ट, बर्थडे और एनिवर्सरी जैसे खास मौकों के लिए आकर्षक हैम्पर तैयार करती हैं। उनके डिजाइन और पैकेजिंग स्टाइल को लोगों ने खूब पसंद किया, जिसके चलते उनकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।
मां बनीं सबसे बड़ी ताकत ..
इशिका की इस सफलता में उनकी मां शीतल जैन का भी अहम योगदान है। वे हर कदम पर बेटी का साथ देती हैं और पैकेजिंग से लेकर अन्य कामों में मदद करती हैं। मां-बेटी की यह जोड़ी आज मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल बन गई है।
सोशल मीडिया से मिली पहचान ..
इशिका ने अपने हुनर को सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया। उनके क्रिएटिव डिजाइन और खास पैकेजिंग स्टाइल ने लोगों का ध्यान खींचा। आज उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 51 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं। बस्तर में आर्ट एंड क्राफ्ट के क्षेत्र में इतनी बड़ी ऑनलाइन पहचान बनाने वाली वे पहली युवती मानी जा रही हैं।
कोविड में शुरू हुआ छोटा काम, अब बना बिजनेस ..
कोविड काल के दौरान जब लोग घरों में सीमित थे, उसी समय इशिका ने अपने हुनर को पहचानते हुए आर्ट एंड क्राफ्ट का काम शुरू किया। लॉकडाउन के बाद उन्होंने वर्ष 2022 में बैंकिंग सेक्टर में नौकरी भी जॉइन की, लेकिन उनका मन अपने क्रिएटिव काम में ही लगा रहा। आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने जुनून को ही करियर बनाने का फैसला किया और पूरी मेहनत के साथ इस दिशा में आगे बढ़ीं। आज उनका यही जुनून एक सफल बिजनेस का रूप ले चुका है।
विदेशों तक पहुंच रहा बस्तर का हुनर ..
इशिका का काम अब केवल बस्तर या छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। वे अब तक जर्मनी के म्यूनिख में 10 से अधिक और अमेरिका के न्यूयॉर्क में 8 से ज्यादा पार्सल भेज चुकी हैं। इसके अलावा दिल्ली, राजस्थान और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी उनके बनाए हैम्पर की अच्छी मांग है। अब तक वे 8 हजार से अधिक ऑर्डर बस्तर से बाहर भेज चुकी हैं।
आज इशिका जैन की कहानी यह साबित करती है कि अगर सपनों को पूरा करने का हौसला हो, तो छोटे शहर की बेटी भी अपने हुनर से दुनिया में पहचान बना सकती है।

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