होम / दुर्ग-भिलाई / जिला पंचायत दुर्ग में “वॉटर सिक्योरिटी एंड कंजर्वेशन” पर कन्वर्जेंस कार्यशाला आयोजित
दुर्ग-भिलाई
-वर्षा जल संचयन व भूजल संरक्षण को लेकर विभागीय समन्वय पर जोर
दुर्ग। कलेक्टर महोदय के मार्गदर्शन में जिला पंचायत दुर्ग के सभा कक्ष में “वॉटर सिक्योरिटी एंड कंजर्वेशन” विषय पर एक महत्वपूर्ण कन्वर्जेंस कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता बजरंग कुमार दुबे, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग ने की। इस कार्यशाला का संयुक्त रूप से आयोजन वॉटरएड इंडिया एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के सहयोग से किया गया।
कार्यशाला में वॉटरएड इंडिया से डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर सौरभ कुमार एवं मनरेगा के एपीओ अरदीप द्वारा संचालन किया गया। उन्होंने जिले में भूजल स्तर बढ़ाने, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने तथा जल संरक्षण के प्रभावी एवं वैज्ञानिक तकनीकी उपायों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत एवं शहरी स्तर पर जल संरक्षण को सुदृढ़ करना, भूजल स्तर में वृद्धि हेतु विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करना तथा सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना रहा। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, शिक्षा विभाग, जल संसाधन (तांदुला) विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में ग्राम पंचायत स्तर पर सोक पिट निर्माण, वर्षा जल संचयन संरचनाओं के विकास एवं भूजल पुनर्भरण कार्यों की आवश्यकता तथा उनके तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया कि जिले के लगभग 450 विद्यालयों में सोक पिट निर्माण सुनिश्चित किया जाए। वहीं लोक निर्माण विभाग को अपने सभी निर्माण कार्यों में सोक पिट को अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए।
नगर निगम भिलाई, नगर निगम दुर्ग, नगर निगम चरोदा एवं नगर निगम रिसाली को भवनों एवं आवासीय परिसरों में 100' सोक पिट एवं रिचार्ज पिट निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संचयन एवं भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि वर्षा जल ही जल का प्रमुख स्रोत है, अतः इसके संरक्षण एवं संचयन हेतु सरल, टिकाऊ एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। वन विभाग द्वारा 1538 केटूल ट्रेंच निर्माण की जानकारी दी गई, जिसे श्रैष्ठ पोर्टल में प्रविष्ट करने के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग को समस्त निर्मित संरचनाओं में सोक पिट निर्माण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
प्रतिभागियों को वर्षा जल संचयन, रन-ऑफ जल को भू-स्तर में संग्रहित करने की तकनीक तथा भूजल भंडारण क्षमता बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि ग्राम स्तर से लेकर शहरी स्तर तक जनसहभागिता बढ़ाने हेतु समुदाय एवं गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा, जिससे जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।
कार्यशाला के अंत में सभी विभागों को निर्देशित किया गया कि वे तकनीकी मानकों के अनुरूप वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण कर जिले में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस एवं समन्वित प्रयास करें।
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