दुर्ग

टैरिफ बढ़ाने के लिए सीएसपीडीसीएल की याचिका पर विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दलील रखते हुए किसानों ने याचिका खारिज करने का आग्रह किया

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दुर्ग। वितरण कंपनी सीएसपीडीसीएल ने 6 हजार करोड़ घाटे का हवाला देते हुए चालू टैरिफ में 23% वृद्धि करने का आग्रह किया है, इस पर कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए रायपुर स्थित आयोग में जनसुनवाई आयोजित किया गया और दावा आपत्ति मांगी गई।
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक एड राजकुमार गुप्त ने आयोग के समक्ष किसानों की ओर से दलील रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी को अधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से बिजली बिल का लगभग 6 हजार करोड़ रुपए वसूल करना है। आम उपभोक्ताओं से बकाया बिल की वसूली के लिए सख्ती किया जाता है बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है लेकिन अधिकारियों, सरकारी विभागों और विधायकों से बकाया बिल की वसूली के लिए वैसी सख्ती नहीं की जाती है। यदि याचिकाकर्ता कंपनी बिल की वसूली कर ले तब घाटा पूरा किया जा सकता है। घाटे की भरपाई के नाम पर टैरिफ बढ़ाने और आम उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ डालने की जरूरत नहीं होगी अतः याचिका खारिज किया जाना चाहिए।
एड राजकुमार गुप्त ने आयोग के समक्ष दलील रखते हुए कहा है याचिकाकर्ता कंपनी को घाटा होने का अन्य प्रमुख कारण बिजली चोरी, लाईन लास और नान बिलिंग शामिल है इसे कम करने की दिशा में कंपनी प्रयास नहीं कर रही है ऐसा करने पर कंपनी लाभ की स्थिति में आ सकती है।
आयोग के समक्ष किसानों के पक्ष में दलील रखते हुए किसान नेता ने कहा कि सभी सिंचाई पंपों में अनिवार्य रूप से स्मार्ट मीटर लगाया जाना चाहिए और निर्धारित यूनिट तक बिजली में छूट की राशि कंपनी को देने के बजाय सीधे किसानों के बैंक खातों में दिया जाना चाहिए। किसान नेता ने आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि अटल ज्योति योजना के अंतर्गत पिछले 10 -12 साल से सिंचाई पंपों की बिजली आपूर्ति में प्रतिदिन 6 घंटों की कटौती की जा रही है, यह कटौती तत्कालीन 5 जिलों में ही लागू है हमारे संगठन द्वारा इसे समाप्त करने के लिए आयोग का ध्यान लगातार हर साल की जनसुनवाई में आकर्षित किया जा रहा है। आयोग में 4-5 अध्यक्ष बदल चुके हैं किंतु बिजली कटौती की समस्या को अब तक बंद नहीं किया गया है।
एड राजकुमार गुप्त ने आयोग से अपील करते हुए कहा कि एक नाम से सिर्फ एक सिंचाई पंप में छूट की योजना को विस्तारित करते हुए एक नाम से दो पंप को लाभ के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए।

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