भिलाई। एक ओर जहां भिलाई का पुलिस प्रशासन सीमित पुलिस बल की कमी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर भिलाई इस्पात संयंत्र का स्थानीय प्रबंधन शहर में लगातार नई समस्याएं खड़ी कर कानून व्यवस्था और शहरी जीवन को प्रभावित कर रहा है। स्थिति यह है कि संयंत्र के प्रभाव क्षेत्र में रहने वाला शायद ही कोई वर्ग ऐसा बचा हो जो भारतीय इस्पात प्राधिकरण अथवा भिलाई इस्पात संयंत्र की नीतियों से संतुष्ट हो।
बीएसपी में कार्यरत कर्मचारी, श्रमिक, सेवानिवृत्त कर्मचारी, व्यापारी वर्ग—सभी निवास और व्यापार संबंधी जटिल नीतियों से परेशान हैं। कई वर्ष पूर्व तोड़े गए बीएसपी के आवास अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, जो असामाजिक तत्वों की सुरक्षित पनाहगाह बनते जा रहे हैं। इन खंडहरों में रोज़ाना अनैतिक गतिविधियों की सूचनाएं मिल रही हैं, जिससे शहर की शांति और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसी विषय को लेकर कांग्रेस नेता एवं स्टील सिटी चैंबर ऑफ कॉमर्स भिलाई के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, दुर्ग को पत्र भेजकर शहर की शांति, सुरक्षा और सुव्यवस्थित बसावट के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में उन्होंने आग्रह किया है कि भारतीय इस्पात प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को भिलाई बुलाकर शहर की बिगड़ती व्यवस्था पर ठोस निर्णय लिए जाएं।
ज्ञानचंद जैन ने आरोप लगाया कि यही वह विभाग है, जिसके नाम पर अक्सर कानून व्यवस्था को प्रभावित करने का दबाव बनाया जाता है। अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें छोड़ने के लिए दबाव, और ऐसा न करने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों पर स्थानांतरण की तलवार लटकने जैसे आरोप भी पत्र में लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर कानून व्यवस्था के लिए यह आवश्यक है कि भिलाई इस्पात संयंत्र के जिम्मेदार अधिकारियों को अपराधियों को संरक्षण देने वाले के रूप में चिन्हित किया जाए। चूंकि यह क्षेत्र बीएसपी के स्वामित्व का है, इसलिए इन खंडहरनुमा मकानों में होने वाली किसी भी आपराधिक घटना की जिम्मेदारी भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों पर तय की जानी चाहिए।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में न तो जिलाधीश दुर्ग के पत्रों का असर दिख रहा है और न ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बातों को बीएसपी प्रबंधन गंभीरता से ले रहा है।
भिलाई टाउनशिप क्षेत्र में लगभग 11,000 प्रभावित परिवार हैं, जिनमें करीब 3,000 दुकानें, 4,500 हाउस लीज मकान, 1,500 रिटेंशनधारी कर्मचारी, 2,000 लाइसेंसधारक तथा केंद्र व राज्य की अन्य संस्थाओं में निवासरत लोग शामिल हैं। इन परिवारों को मिलाकर लगभग 50,000 की आबादी वर्तमान में गंभीर संकट और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
ज्ञानचंद जैन ने दुर्ग रेंज के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं कानून व्यवस्था के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे आगे आकर इस वर्ग को राहत दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। उन्होंने मांग की है कि 15 दिनों के भीतर प्रशासन, पुलिस विभाग, भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक आहूत की जाए, साथ ही नई दिल्ली से भारतीय इस्पात प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश जारी कर भिलाई बुलाया जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए और भविष्य में शहर की व्यवस्था बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब तक शहर में सभी आयोजन अनुमति लेकर होते रहे हैं, लेकिन हालात नहीं सुधरे तो भविष्य में नागरिकों का आक्रोश उग्र रूप ले सकता है।
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