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मेरी जैसी दुर्दशा किसी की न हो - कांकेर के जैनूलाल राना ने पत्र लिखकर जाहिर किया अपना दर्द

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-92 हजार अंतिम वेतन से रिटायर होते ही जीरो पेंशन
-पूर्व सेवा अवधि की गणना करें शासन
-20 वर्ष की अर्हकारी सेवा पर 50 % पेंशन निर्धारण करने की मांग
दुर्ग।
एल.बी. संवर्ग के शिक्षक सेवानिवृति के पश्चात सम्मानजनक जीवन के बजाय आर्थिक तंगी से जुझने को मजबूर हैं, शासन प्रशासन की जटिल प्रक्रियाओं एवं विसंगतिपूर्ण नीतियों ने उनकी वर्षों की सेवा को व्यर्थ बना दिया है। संविलियन के दौरान पूर्व की 20 वर्षों की सेवा अवधि को शून्य मान लिए जाने से बड़ी संख्या में शिक्षक पेंशन के अधिकार से बाहर हो गए हैं। 
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा, प्रांतीय पदाधिकारी जयंत यादव, सरस्वती गिरिया,कमल वैष्णव,संजय चंद्राकर, धनराज डहरे, घनश्याम देवांगन, वीरेन्द्र वर्मा,महेश चन्द्राकर, घनश्याम मंडावी, ने कहा कि संविलियन पूर्व की 20 वर्षों की सेवा शून्य किए जाने एवं संविलियन तिथि 1 जुलाई 2018 से सेवा अवधि की गणना किए जाने से न्यूनतम पेंशन हेतु 10 वर्ष की पात्रता पूरी नहीं करने के कारण कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के श्री जैनुलाल राना व्याख्याता, श्रीमती पारुल दोहरे प्रधान अध्यापक प्रा.शा, मलिना दास प्रधान अध्यापक प्रा.शा., महादेव नरेटी प्रधान अध्यापक प्रा.शा.पाड़ेंगा को 27 वर्षों की सेवा देने के बाद बगैर पेंशन  रिटायरमेंट को मजबूर होना पड़ा है,,यही स्थिति कमोबेश सेवानिवृत हो रहे एल.बी. संवर्ग के प्रत्येक शिक्षक की है। छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार पूर्ण पेंशन के लिए 33 वर्ष की सेवा तथा न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पर अनुपातिक पेंशन का प्रावधान है।लेकिन संविलियन तिथि 1 जुलाई 2018 से सेवा की गणना किए जाने के कारण 2018 से पहले नियुक्त  शिक्षक न्यूनतम पात्रता को भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं, परिणामस्वरुप सेवानिवृत्ति के पश्चात शिक्षकों और उनके परिजनों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।  विशेष रूप से 1998 से नियुक्त शिक्षकों के लिए पेंशन अब केवल एक सपना बनकर रह गई है।
92 हजार वेतन से जीरो पेंशन ..
जैनुलाल राना जी ने एक पत्र लिखकर अपना दर्द बयां किया है, जिससे सरकार को शिक्षकों के सम्मान को बचाये रखने की जिम्मेदारी बनती है, जैनुलाल राना जी के अंतिम महीने का वेतन 92 हजार था, रिटायर होते ही वे जीरो पेंशन स्कीम में फंस गए, यही हाल अधिकांश संविलियन होने वाले शिक्षकों का हो रहा है व आगे भी होगा, सरकार व समाज के बीच सम्मान से गुजर कैसे हो इससे शिक्षक वर्ग चिंतित है। 
5 वर्ष की सेवा में न्यूनतम पेंशन का प्रावधान करें - एसोसिएशन ..
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने शासन से मांग की है कि सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए, शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए, सेवानिवृति के पश्चात मूल वेतन का 50% आजीवन पेंशन सुनिश्चित की जाए।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने
मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव, सचिव वित्त विभाग, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर 10 वर्ष की न्यूनतम सेवा में पेंशन के प्रावधान नियम में रिलेक्सेशन देते हुए 5 वर्ष की न्यूनतम सेवा में पेंशन का प्रावधान करने मांग की है तथा भारत सरकार, उत्तरप्रदेश सरकार व उत्तराखंड सरकार के पत्र का हवाला देते हुए 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा होने पर 50 % पेंशन निर्धारण का प्रावधान करने की मांग की है।
ज्ञात हो कि दिनांक 1/1/1996 से प्रभावशील पुनरीक्षित वेतनमानों में प्राप्त वेतन के आधार पर पेंशन, पेंशन नियम 1976 में परिभाषित अनुसार 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा होने पर 50 % पेंशन निर्धारण का प्रावधान छत्तीसगढ़ राज्य में प्रचलित है, कम सेवा होने पर अनुपातिक पेंशन निर्धारण का नियम है।  
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान , जिला अध्यक्ष शत्रुघन साहू, प्रांतीय पदाधिकारी जयंत यादव, सरस्वती गिरिया,ने कहा है कि भारत सरकार के आदेश सं. 38/37/08-पी.एंड पी डब्ल्यू (ए) कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय (पेंशन एवं पेंशन भोगी कल्याण विभाग नई दिल्ली ) के पेंशन नियम के बिंदू 5 (2) में प्रावधान किया गया है कि पूरी पेंशन के लिए 33 वर्षों की पात्र सेवा के संबंधों को समाप्त कर दिया जाएगा एक बार सरकारी सेवक द्वारा 20 वर्षों की निर्धारित सेवा पूरी कर लेने के बाद पेंशन परिलब्धियों या पिछले 10 महीने के दौरान प्राप्त उपलब्धियों के औसत जो भी अधिक हो कि 50% पेंशन दी जाएगी"। 
उत्तरप्रदेश सरकार के आदेश संख्या 1754/79-5-09–02/2009 लखनऊ दिनांक 16 सितंबर 2009 के "पेंशन नियम 4( 2) में प्रावधान है कि वर्तमान में पूर्ण पेंशन प्राप्त करने के लिए अधिकतम 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा प्रदान करना अनिवार्य है, परंतु उक्त व्यवस्था संशोधित करते हुए तत्काल प्रभाव से या व्यवस्था की जाती है कि पूर्ण पेंशन प्राप्त करने के लिए 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा करना अनिवार्य है जो कर्मी 20 वर्ष की हर कार्य सेवा पूर्ण कर के सेवानिवृत्त होते हैं उन्हें अंतिम आहरित वेतन के 50 प्रतिशत अथवा अंतिम 10 माह में आहरित वेतन के औसत जो भी अधिक लाभप्रद हो, के आधार पर पेंशन अनुमन्य  ( permissible ) होगी"।
उत्तराखंड सरकार के आदेश संख्या 723 / xxvii( 7)/2010 देहरादून 29 अक्टूबर 2010 के स्पस्टीकरण आदेश के बिंदु क्रमांक 6  में प्रावधन किया गया है कि 1 – 1 – 2006 के बाद सेवानिवृत्त कार्मिकों को "20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर पूर्ण पेंशन एवं अंतिम माह में आरिफ औसत वेतन का 50% का लाभ अनुमन्य   ( permissible ) किया गया है"।
जिला अध्यक्ष शत्रुघन साहू, ब्लाक अध्यक्ष किशन देशमुख, मदन साटकर, सालिक राम ठाकुर ने कहा है कि 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा होने के कारण छत्तीसगढ़ के अधिसंख्य कर्मचारी 50 प्रतिशत पेंशन निर्धारण के लाभ से वंचित हो रहे है।
छत्तीसगढ़ में अब तक कभी भी किसी कर्मचारी संगठनों ने 33 वर्ष अर्हकारी सेवा को कम करने का मांग ही नही किया, जिसके कारण अनेकों कर्मचारी 50 प्रतिशत पेंशन से अब तक वंचित होते रहे है।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने मांग किया है कि केंद्र सरकार, उत्तरप्रदेश सरकार, व उत्तराखंड सरकार की तरह छत्तीसगढ़ राज्य में भी पेंशन निर्धारण के लिए 33 वर्ष अर्हकारी सेवा के स्थान पर 20 वर्ष अर्हकारी सेवा होने पर 50 % पेंशन निर्धारण का प्रावधान किया जावे, इससे प्रदेश के अधिसंख्य कर्मचारियो को पूर्ण पेंशन की पात्रता होगी।
क्रमोन्नति हेतु वन टाइम रिलेक्सेशन की मांग ..
 छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि पदोन्नति हेतु न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा थी जिसे एसोसिएशन की थीम पर एक बार के लिए रिलेक्सेशन देते हुए 3 वर्ष करते हुए पदोन्नति दिया गया, अब पदोन्नति से वंचित शिक्षक संवर्ग को क्रमोन्नति हेतु वन टाइम रिलेक्सेशन की मांग की है, सहायक शिक्षकों के शिक्षक एवं प्रधान पाठक प्राथमिक शाला में पदोन्नति होने के बाद पदोन्नति से वंचित करीब 30 हजार सहायक शिक्षक पदोन्नति एवं क्रमोन्नति नहीं मिलने से ठगा सा महसूस कर रहे है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की मांग है कि क्रमोन्नति के लिए 10 वर्ष की सेवा को एक बार के लिए शिथिल करते हुए 5 वर्ष में क्रमोन्नति का लाभ देने का आदेश जारी किया जावे एवं तदनुसार वेतनमान का निर्धारण किया जावे।

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