-जन समर्पण सेवा संस्था के सेवा कार्य को 9 वर्ष पूर्ण
दुर्ग। जन समर्पण सेवा सँस्था दुर्ग ने शहर में जरूरतमंद दिव्यांग जनोँ को ट्राइसिकल व्हीलचेयर एवं बैसाखी का वितरण किया। भूखे को भोजन करवाना एवं दिव्यांग जनोँ की मदद करना सबसे बड़ा मानव धर्म है। इस धर्म को इंगित करते हुए कस्बे की सामाजिक संस्था ‘जन समर्पण सेवा संस्था की ओर से शुरू की गई भोजन सेवा एवं गौ सेवा आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। कोई भूखा ना सोए इस अनुकरणीय पहल के साथ, 1 जनवरी 2017 से आज तक बिना किसी दिन नागा के प्रतिदिन दुर्ग रेल्वे स्टेशन एवं शहर के विभिन्न स्थानों में करीब 200 से अधिक जरूरतमंद गरीब, असहाय, दिव्यांग जनों को निःशुल्क भोजन एवं जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराते हैं।
सँस्था के सदस्य सुजल शर्मा एवं अख्तर खान ने बताया कि दुर्ग रेलवे स्टेशन एवं शहर के कुछ स्थानों में पैदल लड़खड़ाते हुए एवं बैसाखी के सहारे चलने वाले कुछ दिव्यांग जनोँ को व्हीलचेयर ट्राइसिकल एवं बैसाखी की आवश्यकता थी, जिसे देखते हुए संस्था का 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संस्था द्वारा 2 जनवरी को सँस्था की विशेष सहयोगी सुश्री पायल जैन समाज सेविका के जन्मदिवस के अवसर उनके हाथों से 2 दिव्यांग को ट्राइसिकल 1 दिव्यांग को व्हीलचेयर एवं 1 दिव्यांग जन को बैसाखी वितरण किया गया। जिसमें सुनीता राम सुपेला भिलाई एवं दीपमाला देवराज, अटल आवास उरला दुर्ग को ट्रायसिकल अनंत कुमार पवार हाउस भिलाई व्हीलचेयर एवं राजेश कुमार साहू स्टेशन दुर्ग को बैसाखी वितरण की गई। जिसके सहारे अब वे बिना लड़खड़ाये रोड में चल सकेंगे एवं कुछ काम करके जीवन यापन कर सकेंगे। सँस्था द्वारा अपने सेवा के इन 9 वर्षों में 113 बैसाखी 59 ट्रायसिकल एवं 56 ट्रायसिकल का वितरण दिव्यांग जनोँ किया जा चुका है, जो कि अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।

दिव्यांग होना कोई अभिशाप नहीं है वे समाज के ही अभिन्न अंग है। दिव्यांगता अभिशाप नहीं है क्योंकि शारीरिक अभाव को यदि प्रेरणा बना लिया जाए तो दिव्यांगता व्यक्तित्व विकास में सहायक हो जाती है। सोच सही हो तो अभाव भी विशेषता बन जाती है। जन समर्पण सेवा संस्था द्वारा संस्था का 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर अवसर पर शहर के निःशक्त जनों को ट्रायसिकल व्हीलचेयर बैसाखी वितरण किया गया। गरीब असहाय विकलांगों गौ माता पशु पक्षियों की सेवा से बड़ा कोई भी कर्म नही है। भले ही आज के भौतिकवादी युग में ये बातें किताबी लगती हो, मगर आज भी समाज ऐसे लोग मौजूद है, जिन्होनें मानवता की सेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना रखा है।
जन समर्पण सेवा संस्था गरीब, असहाय, भूखों एवं विक्षिप्त लोगों को खाना खिलाने, दिव्यांग जनोँ को ट्रायसिकल व्हीलचेयर बैसाखी कम्मोट चेयर मेडिकल पलंग एवं उनकी हरसम्भव सहायता करने का कार्य विगत 9 वर्ष से लगातार करती आ रही है। संस्था का 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संस्था की विशेष सहयोगी पायल जैन समाज सेविका के जन्मदिवस के नाम से सदस्यों की उपस्थिति में 4 निःशक्त जन जो बहुत दिनों से घिस घिस के चल के अपना जीवन यापन करते है।
उन्हें ट्रायसिकल व्हीलचेयर बैसाखी वितरण किया गया. संस्था के युवा सदस्यों द्वारा नवकार परिसर दुर्ग में सभी निःशक्त जनों का दिव्यांग दिवस के अवसर पर संस्था की विशेष सहयोगी पायल जैन समाज सेविका दुर्ग द्वारा सभी दिव्यांग जनों को माला पहनाकर स्वागत किया, ये निःशक्त जन अब शहर में अलग अलग स्थान जाकर अपना जीवन यापन कर सकते है।

जन समर्पण सेवा संस्था अब दुर्ग ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की सेवा संस्थाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, संस्था द्वारा प्रतिवर्ष दीपावली में बुजुर्गों एवं बच्चों को नया कपड़ा मिष्ठान नमकीन फटाखे का वितरण किया जाता है। इसके साथ प्रतिवर्ष शहर की यह एकमात्र संस्था है जो पशु–पक्षियों के दाना पानी के लिए हजारों मिट्टी से बने सकोरे एवं सीमेंट के कोटना का वितरण करती है, यह संस्था पिछले 9 साल से सभी जरुरतमंदों को प्रतिदिन रात्रि में निःशुल्क भोजन वितरण करते आ रही है जो कि ऐसा कार्य करने वाली यह एकमात्र संस्था है जो बिना रुके बिना किसी दिन नागा किए यह सब सेवा कर रही है।
संस्था का 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पिछले तीन दिवस से विशेष सेवा कार्य किया जा रहा है जिसमें ठंड से बचने के लिए फुटपाथ में सो रहे जरुरतमंदों को कम्बल वितरण एवं भोजन के साथ साथ मिष्ठान नमकीन का वितरण प्रतिदिन किया जा रहा है।
इस अवसर पर सँस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा बंटी, संदीप वोरा, विवेक मिश्रा, मनोज शर्मा, विकाश पुरोहित, आशीष मेश्राम, अर्जित शुक्ला, प्रतिभा पुरोहित, रूपल गुप्ता, सुजल शर्मा, अख्तर खान ,संजय सेन मोहित पुरोहित ऋषि गुप्ता राजेन्द्र ताम्रकार मृदुल गुप्ता अंकेश पेशवानी वाशु शर्मा गौरव बजाज प्रवीण पींचा अनश खान अंश पांडेय सुधीर कुमार तरेंद्र विकाश सापेकर आसिफ खान संदीप साहू हरीश सेन दद्दू ढीमर शुभम् सेन एवं संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
संपादक- पवन देवांगन
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