दुर्ग। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, आनंद सरोवर बघेरा में आयोजित ‘वाह जिंदगी वाह’ शिविर के चौथे दिन परम सत्ता का ज्ञान विषय पर अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर एवं ब्रह्माकुमार प्रो. ई. वी. गिरीश ने गहन और विचारोत्तेजक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा के विषय में समाज में अनेक प्रकार की गलतफहमियां व्याप्त हैं।
प्रो. गिरीश ने उपस्थित जनसमूह से प्रश्न करते हुए कहा कि क्या परमात्मा कैंसर को ठीक करेगा? और क्या परमात्मा कैंसर को ठीक कर सकता है? इस पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान सीधे हमारी बीमारियों को ठीक नहीं करता, बल्कि वह हमें शांति, शक्ति, प्रेम और संबल प्रदान करता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं रोगों से उबरने की शक्ति प्राप्त करता है। परमात्मा गुणों और शक्तियों का भंडार है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर के विषय में अनेक मान्यताएं और विश्वास हैं, लेकिन ईश्वर के सत्य स्वरूप का ज्ञान स्वयं ईश्वर ही आकर देता है। सत्य सार्वभौमिक होता है, उसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। दुख का मूल कारण असत्य के आधार पर जीया गया जीवन है। परमात्मा को जानने से पहले स्वयं को जानना आवश्यक है, क्योंकि स्व-ज्ञान के बिना ईश्वर-ज्ञान संभव नहीं है।
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आत्मा और शरीर के संबंध को समझाते हुए उन्होंने उदाहरण दिया कि जैसे मोबाइल में सिम कार्ड होता है, वैसे ही शरीर में आत्मा रूपी सिम कार्ड होता है। जब तक आत्मा शरीर में है, शरीर प्रतिक्रिया करता है, लेकिन आत्मा निकलने के बाद शरीर निष्क्रिय हो जाता है। आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है, केवल देह का अंत होता है। आत्मा शरीर को संचालित करने वाली चैतन्य ऊर्जा है। अंगदान का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि शरीर के अंग दूसरे शरीर में भी काम करने लगते हैं, इससे स्पष्ट होता है कि शरीर को चलाने वाली शक्ति आत्मा है।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य भौतिक सुविधाओं में स्थायी खुशी ढूंढ रहा है, जबकि ये सभी अस्थायी हैं। स्थायी सुख और शांति विनाशी वस्तुओं से नहीं, बल्कि हमारे भीतर से मिलती है। जीवन को जीने का सही तरीका ही आध्यात्मिकता है, जिसे ईश्वर द्वारा दिया गया जीवन का मैनुअल कहा जा सकता है।
आध्यात्मिकता हमें दो संबंधों की ओर ध्यान दिलाती है—पहला स्वयं का स्वयं से संबंध और दूसरा स्वयं का परमात्मा से संबंध। जब व्यक्ति स्वयं का मित्र बनता है, आत्म-सम्मान, आत्म-विश्वास और आत्म-स्वीकृति विकसित करता है, तो जीवन सहज और आनंदमय हो जाता है। वहीं परमात्मा से गहरा संबंध जीवन को सुख, शांति, प्रेम और आनंद से भर देता है।
उन्होंने कहा कि जब हम परमात्मा से प्राप्त शांति और प्रेम को पूरे संसार में बांटते हैं, तब वास्तव में जिंदगी ‘वाह-वाह’ हो जाती है। उल्लेखनीय है कि ‘वाह जिंदगी वाह’ शिविर का अंतिम दिन 25 दिसंबर को है। आयोजकों ने बताया कि बायपास रोड से आने वाले नगरवासियों को सड़क निर्माण के कारण हो रही असुविधा को दूर कर दिया गया है और अब श्रद्धालु एवं प्रतिभागी बायपास मार्ग से भी आनंद सरोवर, बघेरा पहुंच सकते हैं।
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