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अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन हेतु छत्तीसगढ़ से आर्य प्रतिनिधिमंडल दिल्ली रवाना

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स्वामी दयानन्द की द्विशताब्दी एवं आर्य समाज के 150 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य आयोजन
-डॉ. अजय आर्य 150 प्रतिनिधियों के साथ किया प्रस्थान
दुर्ग।
महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 200वीं जयंती एवं आर्य समाज के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ से एक विशाल आर्य प्रतिनिधिमंडल आज दिल्ली के लिए रवाना हुआ। इस प्रतिनिधिमंडल में आर्ष ज्योति गुरुकुल आश्रम, कोसरंगी, गुरुकुल नव प्रभात, गुरुकुल आमसेना, गुरुकुल कुंडुली, गुरुकुल सलाखिया (रायगढ़) सहित प्रदेश के विभिन्न गुरुकुलों के आचार्य, ब्रह्मचारी, संत गण और श्रद्धालु जन सम्मिलित हैं। स्टेशन पर प्रतिनिधियों का भव्य स्वागत किया गया। “सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय, ऋषि दयानन्द की जय, भारतीय संस्कृति की जय” जैसे जयघोषों से वातावरण गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य प्रतिनिधि एवं वैदिक विद्वान आचार्य डॉ. अजय आर्य इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में “सनातन स्वाभिमान और महर्षि दयानन्द का पुरुषार्थ” विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने प्रस्थान से पूर्व कहा- “महर्षि दयानन्द केवल एक धार्मिक सुधारक नहीं, बल्कि भारत के आत्मगौरव और वैदिक चेतना के जागरण के प्रतीक हैं। आज आवश्यकता है कि आर्य समाज, गुरुकुलों और आर्य विद्यालयों को तकनीकी शिक्षा से जोड़कर राष्ट्र निर्माण के वैदिक आदर्श को व्यवहार में उतारा जाए।”
इस प्रेरणादायक यात्रा के प्रमुख मार्गदर्शक हैं-  विक्रम लाल साहू, आचार्य सुरेश कुमार, आचार्य धर्मराज,  नारायण आर्य,  खिलावन आर्य, प्रबंधक कौशल , त्रिलोचन  तथा टिकेश्वर । आज छत्तीसगढ़ से लगभग 150 आर्य प्रतिनिधि इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, जिनमें गुरुकुल कोसरंगी के 64 विद्यार्थी भी सम्मिलित हैं। स्टेशन पर प्रतिनिधियों को विदा देने हेतु छत्तीसगढ़ प्रांतीय आर्य प्रतिनिधि सभा के अवनी भूषण पुरंग, धर्माचार्य आचार्य अंकित शर्मा शास्त्री, आर्य समाज दुर्ग, आर्य समाज भिलाई, तथा आर्य वीर दल के तुषार कुमार अपने 15 सदस्यों के साथ उपस्थित रहे।
अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के स्वर्ण जयंती पार्क, रोहिणी सेक्टर–10 में 30 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 तक किया जा रहा है, जिसमें 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर वैदिक संस्कृति के प्रचार- प्रसार का ऐतिहासिक मंच सिद्ध होगा।
उल्लेखनीय है कि 31 अक्टूबर को इस आयोजन में भारत के  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आर्य प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे।
आचार्य सुरेश ने इस अवसर पर कहा-  महर्षि दयानन्द के विचार आज भी भारत के आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भविष्य की दिशा दिखाते हैं। हमें अपने गुरुकुलों को केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति और चरित्र के निर्माता संस्थान बनाना है। यही सच्ची आराधना है ऋषि दयानन्द की।

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