सूरजपुर । जिले के भैयाथान इलाके में एक दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। ग्राम बसकर डालाबहरा में सांप के काटने से पति-पत्नी की जान चली गई, क्योंकि परिजनों ने समय पर इलाज के बजाय घंटों तक झाड़-फूंक का सहारा लिया। इस अंधविश्वास के चलते तुलेश्वर सिंह और उनकी पत्नी गीता सिंह की असमय मृत्यु हो गई, जिससे उनके चार बच्चे अनाथ हो गए।
बता दें कि तुलेश्वर सिंह और गीता सिंह अपने घर में फर्श पर सो रहे थे, जब देर रात एक जहरीले करैत सांप ने दोनों को डस लिया। नींद खुलने पर उन्होंने सांप को देखा और उसे मार दिया, लेकिन इसके बाद भी वे वापस सो गए। कुछ देर बाद दोनों की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों को सूचना देने के बावजूद, अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक शुरू कर दी गई। सुबह तक तुलेश्वर का चेहरा सूज गया और दोनों की हालत गंभीर हो गई।
आनन-फानन में दंपती को भैयाथान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गीता सिंह को मृत घोषित कर दिया। तुलेश्वर सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सूरजपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन वहां भी उनकी जान नहीं बच सकी।
यह घटना अंधविश्वास के खतरनाक परिणामों का जीता-जागता उदाहरण है। विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के काटने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। जहरीले सांपों के काटने पर चार घंटे के भीतर एंटीवेनम इंजेक्शन देना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में समय पर इलाज न मिलने के कारण दोनों की जान चली गई।
तुलेश्वर और गीता के चार बच्चों पर अब इस दुखद घटना का गहरा असर पड़ा है। माता-पिता के अचानक चले जाने से बच्चे सदमे में हैं। इस घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
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