भारत की सुरक्षा पर कोई सौदा स्वीकार नहीं
दुर्ग। भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे समय में जब तुर्की बार-बार पाकिस्तान का साथ देता है और भारत पर हुए आतंकी हमलों की निंदा तक नहीं करता, तब तुर्की से जुड़ी किसी भी एयरलाइंस या कंपनी को भारत में अनमति देना सीधे राष्ट्रहित से विश्वासघात है।
15 मई को BCAS ने देशहित में ठोस निर्णय लेते हुए सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्रा. लि. की सुरक्षा मंजूरी रद्द की थी। यह कदम सराहनीय था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अब इंडिगो–टर्किश एयरलाइंस डील को 6 माह का एक्सटेंशन देना आम जनता और युवाओं में गहरा आक्रोश और असंतोष पैदा कर रहा है।
प्रसिद्ध विचारक एवं चिंतक संजय चौबे, ने कहा कि जब हमारे वीर जवान सीमाओं पर अपने प्राण न्यौछावर कर रहे हैं, तब दुश्मन समर्थक देश से जुड़ा कोई भी समझौता करना उनके बलिदान का अपमान है। यह फैसला राष्ट्रहित के विरुद्ध है और इसे तत्काल रद्द करना चाहिए।
प्रकाश सांखला, अध्यक्ष, कैट दुर्ग जिला इकाई ने इसे केवल एक एयरलाइंस को लाभ पहुँचाने वाला फैसला बताया और चेताया कि अगर राष्ट्रीय सुरक्षा को दरकिनार कर कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता दी गई तो व्यापारी वर्ग और आम जनता सड़क पर उतरकर विरोध करेगी।
प्रकाश गोलछा, महामंत्री, ने कहा कि तुर्की से जुड़े किसी भी व्यावसायिक रिश्ते को बढ़ावा देना भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। वहीं प्रहलाद रूंगटा, कार्यकारी अध्यक्ष, ने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि यह कदम युवाओं और देशभक्त नागरिकों का मनोबल तोड़ने वाला है।
पवन बडजात्या, चेयरमैन, ने इसे राष्ट्रीय अपराध की संज्ञा दी और कहा कि यह फैसला भारत की सुरक्षा नीति को कमजोर करता है। पायल जैन, महिला इकाई अध्यक्ष, ने कहा कि महिलाएँ और माताएँ इस निर्णय से चिंतित हैं, क्योंकि यह हमारे परिवारों और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा को खतरे में डालता है।
रवि केवलतानी, युवा इकाई अध्यक्ष, ने युवाओं की ओर से कहा कि यह निर्णय किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनता के विश्वास को बनाए रखना चाहती है तो इस एक्सटेंशन को तुरंत निरस्त करे और स्पष्ट संदेश दे कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है।
कैट की मांगें..
इंडिगो–टर्किश डील पर दिया गया 6 माह का एक्सटेंशन तुरंत निरस्त किया जाए।
तुर्की की किसी भी एयरलाइंस या कंपनी को भारत में सुरक्षा/व्यावसायिक मंजूरी न दी जाए।
भारत सरकार यह स्पष्ट संदेश दे कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा।
यदि इस मामले में ठोस और राष्ट्रहितकारी निर्णय नहीं लिया गया तो यह पूरे देश में जनाक्रोश और व्यापक निंदा का कारण बनेगा।
संपादक- पवन देवांगन
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