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आगम में लिखे गए सूत्र तीर्थंकरों की वाणी है : साध्वी सुलक्षणा श्री

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-जय आनंद मधुकर रतन भवन दुर्ग में आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला जारी 
दुर्ग।
आगम एक दर्पण है इसके लिए मेरा सब कुछ समर्पण है जैन दर्शन का नियम है आगम यह जरूर है कि जैन परंपरा में आगम को लेकर भिन्न-भिन्न मत है। मंदिर मार्गी परंपरा 45 आगम मानती है वही स्थानकवासी परंपरा में 32 आगमों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। वहीं दिगंबर परंपरा में भी आगम का मत अलग है। 
हर धर्म में प्रमुख को स्थान दिया गया है जैसे हिंदू धर्म में गीता को तो मुसलमान धर्म में कुरान को इसी बाइबिल को मानती है तो सिख समुदाय गुरु ग्रंथ साहब को अपने-अपने धर्म में प्रमुखता से स्थान देते हैं इसी तरह जैन धर्म भी गमों को अपना प्रमुख ग्रंथ के रूप में स्वीकार करता है। उक्त विचार जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग की धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्री विचक्षण श्री जी ने कहीं। उन्होंने आगे कहा तीर्थंकर अधिनास से लेकर भगवान महावीर तक के द्वारा कही गई देशना को सूत्र रूप में आगमों में समाहित किया गया है । विश्व की सबसे प्राचीन भाषा प्राकृत भाषा है जैन धर्म जैन दर्शन भी के सभी प्राचीन काल में लिखे गए ग्रंथ सूत्र भी प्राकृत भाषा में ही मिलते हैं।
आगम के हर सूत्र आत्मा को तिराने का काम करते हैं और वही आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का कार्य एक सेतु के रूप में करते हैं। 32 आगमों में 11 अंग सूत्र 12 उपांग 4 मूल सूत्र चार छंद सूत्र , 32 वा आवश्यक सूत्र जैन दर्शन में स्थानकवासी परंपरा में माने जाते हैं। सूत्र और अर्थ रूप में तीर्थंकरों की वाणी है आगम नवकार महामंत्र भी प्राकृत भाषा में ही लिखा गया है। जिसमें अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय और विश्व के सभी साधु साध्वियों की वंदना की गई है। 
धर्म सभा को संबोधित करते हुए समन्वय साधिका श्री प्रियदर्शना श्री जी ने कहा धर्म का मूल सम्यक दर्शन है जिसके अंतर्गत  सत्य अहिंसा दया धर्म दान तप सभी समाहित हे। मैं कौन हूं कहां से आया हूं की खोज आज अत्यंत आवश्यक है। सर्व धर्म का सिद्धांतों का कर स्वयं को पहचाना है आज दूसरों को सलाह देना सबसे बड़ा काम माना जाता है सेवा समर्पण सहयोग से ही संघ समाज चलता है जो आज सबसे कठिन कार्य है जो एक संघ प्रमुख को कांटों में चलने के बराबर है। स्वयं को जानना पहचाना सबसे कठिन काम है सीधी गति से चलने वाले को सिद्ध गति का रास्ता जल्दी मिलता है। 
आत्मानंद वर्षावास लगने के बाद से ही जय आनंद मधुकर रतन भवन में त्याग तपस्या जब तक अनुष्ठान प्रारंभ हो गया है। उपवास आयंबिल एकासना बेला तेला एवं अठाई तप की आराधना प्रारंभ हो गई है जिसमें सोनू पारख आदित्य चौरडिया नेहा सुराणा रोमा पारख धर्मेंद्र मोदी संगीता बाफना की तपस्या निर्विघ्न गतिमान है। इसी तरह कई गुप्त तपस्या भी जय आनंद मधुकर रतन भवन में साध्वी श्री की प्रेरणा से चालू है।
चातुर्मास काल में सुबह सूर्योदय के पश्चात प्रार्थना युवाओं की धार्मिक कक्षाएं प्रवचन दोपहर महिलाओं की धार्मिक कक्षाएं संध्याकालीन प्रतिक्रमण एवं प्रतिक्रमण के पश्चात साध्वी समुदाय के द्वारा धार्मिक जिज्ञासा और समाधान क्रम लगातार चल रहा है। धर्म सभा का संचालन मंत्री राकेश संचेती कर रहे हैं।

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