होम / दुर्ग-भिलाई / "छत्तीसगढ़ में नशा बन रहा अपराध की जड़, दुर्ग को चाहिए अब नशामुक्ति की नई रणनीति" - अरुण वोरा
दुर्ग-भिलाई
दुर्ग। हालिया समय में छत्तीसगढ़ में अपराधों की संख्या तेजी से बढ़ रही है- चाकूबाजी, छेड़छाड़, चोरी, हत्या, लूट जैसे अपराध अब आम बात हो चुकी है। दुर्ग शहर भी इससे अछूता नहीं है, विशेषकर सिकोला बस्ती, बघेरा, प्रेमनगर, मोहलाई-उरला, बोरसी और शंकर नगर जैसे बाहरी इलाकों में अपराधों की दर खतरनाक रूप से बढ़ रही है।
पिछले महीनों जो अपराध या सड़क हादसे की घटनाएँ हुई हैं, उनकी जड़ तक जाने पर एक कारण बार-बार सामने आता है- बढ़ती नशे की लत।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अरुण वोरा ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा-
> “नशा अब केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का संकट बन गया है। छत्तीसगढ़ के युवाओं को आज गांजा, अफीम, हेरोइन, ब्राउन शुगर, नाइट्रोजन, अल्फाजोन, सिरप और कोकिन जैसी जानलेवा चीजें आसानी से मिल रही हैं। तस्कर बाहरी राज्यों से अलग-अलग माध्यमों में इनकी खेप भेज रहे हैं और हमारे युवा उनके आसान शिकार बन रहे हैं।”
अरुण वोरा ने भाजपा सरकार
के विदेशी शराब की कीमतें घटाने के फैसले पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, "सस्ती शराब का कदम न केवल नशे की आदत को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज में बढ़ते अपराधों और अवैध गतिविधियों को भी और हवा देगा। यह सरकार नशे के कारोबार को नियंत्रित करने की बजाय उसे प्रोत्साहित कर रही है और शराब प्रेमियों को नए-नए तोहफे दे रही है। लोगों को शराब खरीदने में सुविधा देने के लिए भाजपा सरकार द्वारा 'मनपसंद' ऐप का लॉन्च भी इसी दिशा में एक कदम है।
उन्होंने कहा कि “आज छत्तीसगढ़ के युवा महानगरों की तरह महंगे और खतरनाक नशे की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारी पुलिस और प्रशासन अभी भी पारंपरिक सोच के साथ काम कर रहे हैं। अब नए स्तर की रणनीति और मेट्रो सिटी मॉडल पर काम करने की जरूरत है।”
अरुण वोरा के सुझाव -
जन-जागरूकता अभियान..
दुर्ग शहर में प्रशासन और पुलिस को मिलकर 'निजात अभियान' की तर्ज पर विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। स्कूल, कॉलेज, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित कार्यक्रम आयोजित हों।
नशा करने वालों की पहचान और काउंसलिंग...
थानों में काउंसलिंग सेंटर स्थापित किए जाएं। जो लोग नशे के आदी हैं, उनकी सूची बनाकर उन्हें पुनर्वास की दिशा में मार्गदर्शन दिया जाए।
सख्त ट्रैफिक चेकिंग...
शराब या नशे की हालत में गाड़ी चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। खासकर रात के समय अल्कोहल चेकिंग (ब्रीथ एनालाइज़र) से जांच की जाए और चालान व गिरफ्तारी की कार्रवाई हो।
बाहरी इलाकों में फोकस...
सिकोला बस्ती, बघेरा, मोहलाई-उरला, प्रेमनगर, बोरसी और शंकर नगर जैसे इलाकों में विशेष गश्त, गुप्त निगरानी और तस्करी पर रोकथाम की ज़रूरत है।
एनसीबी कार्यालय की मांग...
अरुण वोरा ने केंद्र सरकार से मांग की कि छत्तीसगढ़ में एनसीबी का स्थायी कार्यालय जल्द खोला जाए, ताकि मादक पदार्थों की तस्करी पर सीधे नियंत्रण हो सके।
साइबर और नशा अपराध की समांतर रोकथाम...
नशे से जुड़े साइबर अपराध (जैसे डार्क वेब से ड्रग्स ऑर्डर करना) को रोकने के लिए साइबर सेल को भी सशक्त और जागरूक किया जाए।
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