दुर्ग में नया कांग्रेस भवन का 20 को सोनिया गांधी करेंगे ऑनलाइन शिलान्यास...जिले के प्रभारी गिरीश देवांगन ने किया स्थल का निरीक्षण

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दक्षिणापथ,रायपुर । कोरोना संक्रमित लेकिन बिना लक्षणों वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में रखने की सलाह दी जाती है। लेकिन इस आइसोलेशन अवधि में मरीजांे के समुचित उपचार के साथ ही उनका मनोबल भी उंचा रखना जरूरी होता है। रायपुर जिले का होम आइसोलेशन सिस्टम यह काम बखूबी कर रहा है और यह दूसरों के लिए माॅडल साबित हो रहा है।
         जिले के एडीएम श्री विनीत नन्दनवार के मार्गदर्शन में रायपुर जिला कलेक्टोरेट में बनाए गए होम आइसोलेशन कंट्रोल रूम जो कि 24 × 7 संचालित है,मंे  हर समय गहमा गहमी रहती है। शुरूआत बिना लक्षण वाले मरीजों के पाजिटिव चिन्हांकन होने के बाद उन्हें होम आइसोलेशन एप के जरिये ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद नोडल अधिकारियों  के माध्यम से घर तक दवाइयां पहुचाने से होती है। फिर डाक्टर की अनुमति के बाद होम आइसोलेशन की अवधि प्रारंभ होती है। काउंसलर मरीजों को समय≤ पर फोन करते हैं,उनकी तबीयत जानने के लिए और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए भी । आपातकालीन नम्बर के माध्यम से विशेषज्ञ डाक्टर्स, मरीजों की समस्याएं सुन कर उसका हल भी बताते हैं। तबीयत ज्यादा खराब लगने पर तत्काल असिस्टेंट नोडल अधिकारियों डॉ अंजलि शर्मा, नोविता सिन्हा, चंद्रकांत राही के माध्यम से मरीजों को  हॉस्पिटल या कोविड केअर सेन्टर भेजा जाता है।
      ऐसे मामलों में लगातार जोन,ब्लॉक और जनपद में नियुक्त किये गए चिकित्सकों को ऑनलाइन कंसल्टेशन की जिम्मेदारी दी गयी है और आपात स्थिति में रिस्पांस टीम की त्वरित तैयारी की वजह से रायपुर में होम आइसोलेशन मैनेजमेंट का माडल सफल हो रहा है।
      अब तक रायपुर जिले में 14602 मरीजों को होम आइसोलेशन की अनुमति दी गई है। इसमें  से 12171 होम आइसोलेशन की अवधि पूरी कर स्वस्थ हो गए हैं।

कोरोना से जंग में मास्क है अभी अचूक हथियार

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क लगाना जरूरी है, यह बात कुछ समझदार लोग जान गए हैं। लेकिन जो समझ कर भी नही समझ रहें , उनके लिए अब एक ही उपाय है कि उन्हे याद दिलाया जाए, घर के लोगों द्वारा ,परिजनों द्वारा, बच्चों द्वारा ,अजनबियों द्वारा। यह याद दिलाना टोकने जैसा होना चाहिए ताकि व्यक्ति को अपनी गलती समझ  में आए और वह मास्क लगाने की आदत डाल लें, मजबूरी में ही सही। चिकित्सक भी लगातार यही कह रहंे कि मास्क ही फिलहाल वैक्सीन का काम करेगा और कर भी रहा है।
     मेकाहारा के कम्यूनिटी मेडीसीन विभाग ने इस संबंध में रायपुर शहर में सर्वे कराया कि आखिर लोग मास्क क्यूं नही पहनते हंै। सर्वे के  अनुसार 32 प्रतिशत व्यक्ति कहते हैं कि वे गरीब है और मास्क खरीद नही सकते। जबकि वैज्ञानिक यह कहते हैं कि कपड़े के मास्क भी असरदार होते हैं। कुछ प्रतिशत व्यक्ति यह भी कहते हुए पाए गए कि मास्क से बीमारी नही रूकती, कुछ ने कहा कि गुटखा खाने के बाद थूकने में दिक्कत होती है, कुछ ने कहा संास लेने मे कठिनाई आदि- आदि । जितने मुंह ,उतनी बातें।
     लेकिन अभी सबसे जरूरी यह बात याद रखना है कि मास्क ही फिलहाल हमारा हथियार है ,कोरोना से जंग में और यह जंग जीतनी ही होगी हमें ।