भाजपा का काम राम राम जपना पराया माल अपना : भूपेश बघेल

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RO No.12822/158

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दक्षिणापथ, भिलाई। नेहरू नगर भिलाई में महिला सशक्तिकरण संघ दुर्ग भिलाई और महामानव मल्टीपर्पज सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में माता रमाई की जयंती के साथ महामानव मल्टीपरपज सोसाइटी के कार्यालय में मनाई गई। सर्वप्रथम शाक्यमुनि तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर तथा बाबासाहेब आंबेडकर और माता रमाई की छाया चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया। तत्पश्चात महामानव मल्टीपरपज सोसाइटी के और महिला सशक्तिकरण संघ के पदाधिकारियों के द्वारा त्रिशरण पंचशील और बुद्ध वंदना का सामूहिक पाठ किया गया। महिला सशक्तिकरण की अध्यक्ष प्रज्ञा बौद्ध ने माता रमाई की जीवनी पर प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि रमाबाई का जन्म 7 फरवरी 1898 में दाभोल के पास वणद गांव में हुआ। इनके पिता भिकू धुतरे एवं माता रुकमणी था। भिकू धुतरे दाभोल बंदरगाह पर हमाली का काम किया करते थे और अपने परिवार का पालन पोषण किया करते थे। जब रमाबाई छोटी थी तभी उनके सर से माता पिता का साया उठ गया था मात्री पितृ हीन बच्चों का पालन पोषण उनके चाचा और मामा ने किया। उनके भाई शंकर धोत्रे मुंबई के भायखला मुद्रणालय में नौकरी करते थे। जब रमा की उम्र 9 वर्ष की थी तभी उनका विवाह भीमराव अंबेडकर के साथ हुआ। उस समय भीमराव अंबेडकर 17 वर्ष के थे। उस समय बाल विवाह की प्रथा थी इसलिए इसीलिए भीमराव के पिता राम सकपाल ने भायखला मुंबई के मछली बाजार में इन दोनों की शादी कर दिया। भीमराव अंबेडकर की पढ़ाई में रमाबाई कभी बाधक नहीं बनी भीमराव अंबेडकर अपनी पत्नी को प्यार से रामू कह कर बुलाते थे बाबा साहब जब उच्च शिक्षा के लिए कोलंबिया अमेरिका चले गए तब वह अपने रामू को पढऩा लिखना सिखा दिए थे वे वहां से रमाई के लिए पत्र लिखा करते थे। रमाई भी बाबासाहेब आंबेडकर के लिए पत्र लिखती थी और घर की चिंता नहीं करने के लिए कहती थी और अच्छे से अच्छे पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते रहती थी। बाबा साहब की कुल 5 संताने थी जिसमें केवल यशवंत राव अंबेडकर ही जीवित रहे बाकी गंगाधर रमेश इंदु और राजरत्न गरीबी के कारण और दवाई के अभाव में इस दुनिया से विदा हो गए तब भी बाबा साहब विचलित नहीं हुए और माता रमाई को हमेशा समझाते थे की हमारे लाखों लाखों बच्चे हैं। जिन की सेवा करना हमारा कर्तव्य है हिंदू धर्म में बहुत सारे विषमता हैं। इनको मैं दूर करने के लिए भरपूर प्रयास करूंगा और सारी विषमताओं को मिटा करके समानता समता स्वतंत्रता और बंधुता न्याय ऐसा भारत बनाऊंगा जिसमें सबको न्याय मिलेगा। भारतीय बौद्ध महासभा के राष्ट्रीय ट्रस्टी मेंबर एसआर कानडे ने संबोधित करते हुए बताया की किसी महापुरुष के आगे बढऩे में महिलाओं का कितना हाथ होता है यह सब हमको माता रमाई की जीवनी को पढऩे से मिलती हैं। माता रमाई के बलिदान और त्याग के कारण ही भीमराव अंबेडकर विश्व भूषण भारत रत्न डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर बने। यदि बाबा साहब के जीवन में माता रमाई ना होती तो शायद भीमराव अंबेडकर बाबा साहब नहीं बन पाते। माता रमाई ने बचपन से ही कष्ट झेला जब वह ससुराल आई तो वहां भी कष्ट का ही अंबार था उन कष्टों को उन्होंने बड़ी शालीनता से बड़ी विनम्रता से सहन कर बड़े आत्मविश्वास से अपने जीवन संघर्ष को आगे बढ़ाती गई और जब ससुराल आई तो यहां भी कभी अपने बच्चों के मरने का गम कभी अपने पिता के समान ससुर के मरने का गम कभी अपने रिश्तेदारों का अपने से जुदा होने का गम जीवन में केवल गम ही गम उन्होंने होगा और गम के आंसुओं को उन्होंने पी लिया। इन्हीं सब कारणों से बाबा साहब सशक्त बने उस समय की परिस्थितियां सामाजिक विषमता से भरी हुई थी इन विषमताओं को बाबा साहब ने दूर करने का बीड़ा उठाया था चाहे वो चवदार तालाब का सत्याग्रह या नासिक का कालाराम मंदिर का प्रवेश की घटनाएं हो सभी में माता रमाई ने बाबासाहेब आंबेडकर का साथ दिया। एक बार माता रमाई पंढरपुर जाने की बात कहती है तब बाबा साहब को समझाते हुए बताते हैं कि जहां हमें प्रवेश नहीं करने दिया जाता वहां जाने से क्या फायदा मैं तुम्हारे लिए एक ऐसा मंदिर बनवाऊगा जहां पर स्वतंत्रता समता बंधुता और न्याय होगा जहां सब कोई मिलकर जाएंगे किसी के लिए भेदभाव नहीं होगा और उन्होंने नागपुर में 14 एकड़ की जमीन पर दीक्षाभूमि बनवाया जहां आज भी लाखों लोग जाकर शांति का अनुभव करते हैं। अंत में महामानव मल्टीपरपज सोसाइटी के अध्यक्ष आशीष चौहान ने आभार व्यक्त किया कार्यक्रम का संचालन महिला सशक्तिकरण संघ की जिला महासचिव कल्पना गजभिए ने संचालन किया। इस अवसर पर जिले के अध्यक्ष जय बौद्ध लीना वैद्य महिला सशक्तिकरण संघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष प्रज्ञा बौद्ध प्रियंका मोठ घरे रंजना वॉल वान्दरे संगीता खोबरागडे, डॉक्टर सुषमा रोकड़े प्रीतिमा, शैलेंद्र भगत प्रवीण, वासनिक, पूनम ढोक, एसआर कानडे पूनम खापर्डे उपस्थित रहे। प्रतिभा बन्सोड भी उपस्थित रही। जरूरतमंद को संस्था देगी नि:शुल्क ऑक्सीजन सिलेंडर अंत में आशीष चौहान ने बताया महिला सशक्तिकरण संघ छत्तीसगढ़ और महामानव मल्टीपरपज सोसाइटी को वियतनाम की इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फ्रेंस की संस्था केयर विथ प्रेयर के द्वारा दो ऑक्सीजन सिलेंडर डोनेशन के रूप में मिला हैं। जिसे जरूरतमंद लोगों को हमारी संस्था की ओर से निशुल्क दिया जाएगा। जिसको भी ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत होगा वे लोग ऑक्सीजन सिलेंडर ले जा सकते हैं और फिर उसे ऑक्सीजन भरवा कर वापस कर सकते हैं। यह ऑक्सीजन सिलेंडर दुर्ग भिलाई के जरूरतमंद लोगों को निशुल्क दिया जाएगा।