-आनंद सरोवर बघेरा में 40 बच्चों और 10 शिक्षकों के लिए आध्यात्मिक आयोजन, राजयोग ध्यान और खेलों के माध्यम से दिया सकारात्मक सोच का संदेश

दुर्ग। नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, दुर्ग द्वारा मानवता, संवेदनशीलता और आत्मिक सशक्तिकरण का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया गया। बघेरा स्थित आनंद सरोवर में ब्राइट मंदबुद्धि विद्यालय के 40 बच्चों एवं 10 शिक्षकों के लिए विशेष आध्यात्मिक एवं मूल्यनिष्ठ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें खेल-खेल में जीवन-मूल्यों की शिक्षा, प्रेरक कहानियों और राजयोग ध्यान के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और आंतरिक खुशी विकसित करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष बच्चों को अपनत्वपूर्ण वातावरण प्रदान करने के साथ उनके भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानने और प्रोत्साहित करने का संदेश देना था। साथ ही, इन बच्चों के साथ निरंतर धैर्य, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने वाले शिक्षकों को मानसिक शांति एवं आत्मिक शक्ति का अनुभव कराने पर भी जोर दिया गया।
-बच्चों की देखभाल के लिए धैर्य के साथ आत्मिक शक्ति भी जरूरी: रीटा दीदी
ब्रह्माकुमारी संस्था की दुर्ग संचालिका रीटा दीदी ने कहा कि विशेष बच्चों की परवरिश और उनकी आवश्यकताओं को समझने के लिए धैर्य, सहनशीलता और भावनात्मक शक्ति की आवश्यकता होती है। माता-पिता के साथ-साथ उन शिक्षकों का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो प्रतिदिन बच्चों को स्नेहपूर्वक संभालते हैं और उनके छोटे-छोटे प्रयासों को सफलता में बदलने के लिए निरंतर मेहनत करते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को ज्ञान और प्रशिक्षण के साथ मानसिक शांति, सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्मिक शक्ति की भी आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से बच्चों के साथ शिक्षकों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया, ताकि वे स्वयं आंतरिक रूप से सशक्त होकर बच्चों का बेहतर मार्गदर्शन कर सकें।
-आत्मशक्ति और गुणों को पहचानें बच्चे: चैतन्य प्रभा दीदी
ब्रह्माकुमारी चैतन्य प्रभा दीदी ने सरल एवं प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को अपनी आंतरिक शक्तियों और गुणों को पहचानने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसकी शारीरिक क्षमताओं से नहीं होती, बल्कि उसके भीतर मौजूद चेतना, गुणों और संभावनाओं से होती है। प्रत्येक बच्चे के भीतर विशेष योग्यताएं होती हैं, जिन्हें पहचानने और विकसित करने के लिए प्रोत्साहन तथा सकारात्मक वातावरण जरूरी है।
उन्होंने बच्चों को समझाया कि स्वयं को किसी कमी के आधार पर कम नहीं आंकना चाहिए। परिस्थितियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि कई बार किसी घटना का अच्छा पक्ष तत्काल दिखाई नहीं देता। आशावादी सोच हमें कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देती है।
चैतन्य प्रभा दीदी ने बच्चों को प्रतिदिन कम से कम तीन मिनट राजयोग ध्यान का अभ्यास करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि ध्यान से मन को शांति मिलती है, विचारों में सकारात्मकता आती है तथा व्यवहार और कर्मों में निखार आता है।
-आंतरिक खुशी से खिलती है चेहरे पर मुस्कान: खुशबू दीदी
ब्रह्माकुमारी खुशबू दीदी ने रोचक खेलों और सरल गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य समझाए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसकी बाहरी सुंदरता, धन-दौलत या शारीरिक बनावट से नहीं, बल्कि उसके आंतरिक गुणों, व्यवहार और दूसरों के प्रति दृष्टिकोण से होती है।
उन्होंने बच्चों को छोटी-छोटी कठिनाइयों से निराश नहीं होने, अपने भीतर छिपी योग्यताओं को पहचानने और उनका भरपूर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आंतरिक खुशी का अनुभव करने वाला व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी आशा और उत्साह बनाए रख सकता है। सकारात्मक विचारों का प्रभाव हमारे चेहरे की मुस्कान, व्यवहार और आपसी संबंधों में भी दिखाई देता है। खेल-खेल में दी गई इन शिक्षाओं के माध्यम से बच्चों को साहस, आत्मविश्वास, अच्छी संगति और सकारात्मक सोच का महत्व समझाया गया।
-सांकेतिक भाषा के माध्यम से बच्चों तक पहुंचाया संदेश
कार्यक्रम में ब्राइट मंदबुद्धि विद्यालय, दुर्ग की शिक्षिका गायत्री सोनी ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से बच्चों तक शिक्षाओं को पहुंचाने में सहयोग किया। इससे बच्चों को कार्यक्रम की गतिविधियों और संदेशों को समझने तथा उनमें सहभागिता करने में मदद मिली।
उल्लेखनीय है कि ब्राइट मंदबुद्धि विद्यालय वर्ष 1999 से दुर्ग में संचालित है और विशेष बच्चों की शिक्षा एवं विकास के लिए कार्य कर रहा है। आनंद सरोवर में आयोजित यह कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चला। इस दौरान राजयोग मेडिटेशन, आध्यात्मिक ज्ञान और मूल्यनिष्ठ खेलों के माध्यम से बच्चों को आनंदमय वातावरण प्रदान किया गया। कार्यक्रम के समापन पर बच्चों एवं शिक्षकों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई।
-विशेष बच्चों को दया नहीं, सम्मान और अवसर देने की जरूरत
यह आयोजन समाज को संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का महत्वपूर्ण संदेश दे गया। विशेष बच्चों को केवल उनकी कठिनाइयों के आधार पर देखने के बजाय उनकी भावनाओं, सपनों और संभावनाओं को समझने की जरूरत है। उन्हें आगे बढ़ने के लिए स्नेह, प्रोत्साहन, सम्मान और उचित अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
साथ ही, इन बच्चों के विकास के लिए निरंतर समर्पण के साथ कार्य करने वाले माता-पिता, शिक्षकों और संस्थाओं के प्रयासों को सम्मान देना भी आवश्यक है। नवरात्रि के अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्था की यह पहल इस विचार को साकार करती है कि शक्ति की उपासना केवल देवी आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद बच्चों के भीतर साहस, आत्मविश्वास और खुशियों की ज्योति जगाना भी उसका महत्वपूर्ण रूप है। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना, उनकी क्षमताओं को प्रोत्साहित करना और उन्हें सम्मानपूर्ण वातावरण देना ही इस आयोजन की वास्तविक सार्थकता रही।
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