-विश्व पर्यटन दिवस पर यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (दुर्ग-भिलाई) का मानसून एडवेंचर, 28 सदस्यों ने तय की रोमांचक राह
भिलाई। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर 'यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (दुर्ग-भिलाई इकाई) द्वारा एक दिवसीय 'मानसून एडवेंचर बाइक ट्रैकिंग' का सफल आयोजन किया गया। इस रोमांचक यात्रा में कुल 28 महिला एवं पुरुष सदस्यों ने हिस्सा लिया। यात्रा के दौरान सदस्यों ने रानी माई मंदिर नर्रा (मुल्लेगुड़ा), सियादेवी मंदिर एवं वॉटरफॉल नारागांव, स्वामी शरणानंद वन आश्रम खोलडोंगरी बरही, बरही जलाशय, भोलापठार पर्रेगुड़ा तथा महापाषाणीय पुरातात्विक स्मारक स्थल करकाभाट का विस्तृत अवलोकन किया।
-वन पथ की हरियाली देख रोमांचित हुए सदस्य
आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए संस्था के दुर्ग-भिलाई इकाई अध्यक्ष ऋषिकान्त तिवारी ने बताया कि झलमला के बाद घोठिया मार्ग से रानी माई मंदिर के लिए वनांचल में प्रवेश करते ही प्राकृतिक सौंदर्य और शांत सुरम्य वातावरण देखकर सभी सदस्य रोमांचित हो उठे। रानी माई मंदिर तक लगभग 10-12 किलोमीटर के मार्ग में दोनों ओर फैले हरे-भरे पेड़-पौधों की छटा ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। ट्रैकिंग के पहले पड़ाव के रूप में सदस्यों ने बारह गांवों के पठार पर स्थित रानी माई देशमात्र बाबा मंदिर का दर्शन एवं अवलोकन किया।
-सियादेवी वॉटरफॉल के सौंदर्य में सराबोर हुए राइडर्स
संस्था के वरिष्ठ सदस्य हरदेव सिंह गिल, चैतन्य ऋषि एवं मोहनलाल साहू ने बताया कि पथरीले व जंगली रास्तों पर एडवेंचरस बाइकिंग का आनंद लेते हुए सभी सदस्य सियादेवी वॉटरफॉल पहुंचे। वहां के अलौकिक व मनोरम वातावरण से सभी अभिभूत हो गए। सियादेवी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद झरने के कल-कल बहते पानी को देखकर सदस्य खुद को भीगने से रोक नहीं सके। लगातार हुई बारिश के कारण झरना अपने पूरे शबाब पर था, जिसका सभी ने भरपूर आनंद उठाया।
-बरही जलाशय और भोलापठार की खूबसूरती ने बांधा समां
राजश्री श्रृंगारपुतले, ममता साहू एवं सुलेखा साहू ने बताया कि झरने के खूबसूरत तट पर स्वरुचिकर भोजन करने के बाद सभी सदस्य खोलडोंगरी बरही पहुंचे। यह स्थान भी प्राकृतिक दृष्टि से अद्भुत है; एक ओर ऊंची पहाड़ी और दूसरी ओर फैला बरही जलाशय पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इसके बाद अगले पड़ाव के रूप में सदस्य भोलापठार पर्रेगुड़ा पहुंचे। इस जगह की छटा देखकर सदस्यों ने कहा कि हमारे आसपास ही ऐसे मनमोहक स्थल मौजूद हैं कि हमें प्राकृतिक सुंदरता की तलाश में कहीं दूर जाने की आवश्यकता ही नहीं है।
-करकाभाट: 5,000 वर्ष प्राचीन पुरातात्विक विरासत से हुए रूबरू
संस्था के पदाधिकारी हेमलाल देवांगन एवं सुबोध देवांगन ने बताया कि अंतिम पड़ाव के रूप में सभी सदस्य करकाभाट स्थित महापाषाणीय पुरातात्विक स्मारक स्थल पहुंचे। लगभग 25-30 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला यह 5,000 वर्ष पुराना स्थल विश्व का सबसे बड़ा महापाषाणीय पुरातात्विक स्मारक माना जाता है। विश्व पर्यटन दिवस पर अपने ही अंचल के ऐसे अचर्चित, अज्ञात व अल्पज्ञात प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को करीब से जानकर सभी सदस्य बेहद प्रसन्न नजर आए।
-विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रकृति प्रेमियों का रहा सराहनीय सहयोग
इस एडवेंचर राइड में दुर्ग-भिलाई के अलावा रायपुर एवं राजनांदगांव के प्रकृति प्रेमी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजन को सुचारू एवं सफल बनाने में संस्था की दुर्ग-भिलाई इकाई के चेयरमैन के. सुब्रमण्यम, किशोर छबलानी, कमल साहू, लिगेन्द्र वर्मा, अथर्व वर्मा, योगेन्द्र वर्मा, त्र्यंबक बंजारे, जय कुमार बंजारे, मंजीत कौर गिल, मोनिका मेहरा, संजय महाजन, ओमकुमारी देवांगन, हेमांगी ऋषि, संजय साहू, संजीव सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, अरुणाभ बिसेन, समता मिश्रा, पल्लवी मेश्राम एवं आदर्श अग्रवाल का विशेष व सराहनीय योगदान रहा।
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