-पर्युषणपर्व का श्रमण संघ परिवार ने किया तप साधना से स्वागत अभिनंदन
-महिलाएं पीली साड़ी एवं पुरुष वर्ग सफेद सामायिक वेशभूषा में धर्म सभा में उपस्थित

दुर्ग। जैन धर्म में पर्युषण पर्व को आत्मचिंतन, संयम, तपस्या, अहिंसा और क्षमाभाव की साधना का महान पर्व माना गया है। यह पर्व केवल बाहरी उत्सव अथवा धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और आत्मा की शुद्धि की ओर अग्रसर करने का अवसर प्रदान करता है।
पर्युषण पर्व के संदर्भ में मुख्य रूप से अहिंसा, क्षमा और संवत्सरी इन तीन भावों का विशेष महत्व बताया गया है। वर्षभर के पश्चात आने के कारण इसे वर्षधर पर्व भी कहा गया है। संवत्सरी पर्व की ऐतिहासिकता का उल्लेख जैन आगम एवं प्राचीन सूत्रों, विशेष रूप से ‘जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति’ आदि में मिलता है उक्त विचार जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग की धर्म सभा को संबोधित करते हुए मानव मिलन के संस्थापक राष्ट्र संत डा मणिभद्र मुनि ने कहीं।
-लौकिक और लोकोत्तर पर्वों में अंतर
धार्मिक चिंतन के अनुसार मुख्य रूप से पर्व दो प्रकार के होते हैं लौकिक एवं लोकोत्तर
लौकिक पर्वों का केंद्र प्रायः बाहरी सजावट, शरीर का सुसज्जित करना तथा आमोद-प्रमोद तक सीमित रहता है। इसके विपरीत लोकोत्तर पर्व मनुष्य को बाहरी आडंबर से ऊपर उठाकर आत्मचिंतन, संयम, तप, त्याग, क्षमा और आत्मशुद्धि की दिशा में ले जाते हैं।
-पर्युषण पर्व का वास्तविक संदेश
पर्युषण हमें यह संदेश देता है कि मनुष्य केवल बाहरी जीवन को सुंदर बनाने तक सीमित न रहे।
जैन दर्शन में पर्युषण इसलिए विशिष्ट है क्योंकि यह पर्व व्यक्ति को भय और प्रलोभन से नहीं, बल्कि आत्मबोध और संयम से जोड़ता है। यही कारण है कि पर्युषण पर्व को जीवन में नई दिशा देने वाला और आत्मकल्याण की ओर ले जाने वाला महान आध्यात्मिक पर्व कहा गया है।
-आचार्य सम्राट जयमल जी महाराज का चमत्कारिक जाप रात्रि में 8:15 से 9:20 तक प्रतिदिन होगा
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पर्यूषण पर्व में आचार्य सम्राट श्री जयमल जी महाराज का चमत्कारी जाप अनुष्ठान जय आनंद मधुकर रतन भवन बांदा तालाब दुर्ग में रात्रि को प्रतिदिन आयोजित होगा।
-आठ दिनों तक महिलाएं अलग-अलग रंगों की साड़ी पहन कर आएंगी धर्म सभा में
पर्यूषण पर्व के दौरान श्रमण संघ परिवार की महिलाएं प्रतिदिन अलग-अलग रंग की साड़ियों में धर्म सभा में उपस्थित रहेगी पर्यूषण पर्व के दौरान प्रतिदिन दोपहर को 2 बजे से साध्वी लक्ष्मी जी महाराज कल्प सूत्र का वाचन करेंगे आज कल्प सूत्र वाचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमण संघ परिवार की महिलाएं उपस्थित थी और कल्प सूत्र वाचन के पश्चात श्रवण संघ महिला मंडल ने धार्मिक प्रश्नोत्तरी गेम प्रतियोगिता का आयोजन रखा था अलग-अलग विषयों पर ऐसी प्रतियोगिता प्रयुषण पर्व के दौरान दोपहर को प्रतिदिन आयोजित होगी।
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