होम / बड़ी ख़बरें / छत्तीसगढ़ की धूम, दिल्ली में गूंज , पीएम मोदी ने खुद सराहा , सीएम साय का प्रस्तुतिकरण, 4 राज्यों की प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ रहा सबसे उत्कृष्ट
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-क्रिटिकल ब्लॉक्स हुए जीरो, जल संकटग्रस्त ब्लॉक्स 26 से घटकर 19, छत्तीसगढ़ बना देश का नंबर-1 "वाटर मॉडल स्टेट"
रायपुर। नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय आयोजित नेशनल वाटर समिट में छत्तीसगढ़ ने वो कर दिखाया अपुरे देश का विषय बन गया है। समिट के समापन सत्र में देशभर से कुल 4 राज्यों को अपने जल मॉडल पर प्रस्तुतिकरण देने का अवसर मिला, और इन सबमें छत्तीसगढ़ का प्रस्तुतिकरण सबसे शानदार और सर्वश्रेष्ठ रहा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने थीम-2 कैच द रेन (जल संचय जन भागीदारी) पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए जो प्रस्तुतिकरण दिया, वह इतना प्रभावशाली रहा कि खुद प्रधानमंत्री ने मंच से इसकी खुलकर सराहना की।
PM मोदी ने की खुले मंच से तारीफ, 4 में से सर्वश्रेष्ठ रहा छत्तीसगढ़ का प्रस्तुतिकरण ..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंच पर मौजूद अन्य राज्यों के मंत्रियों, सचिवों एवं डेलिगेशन के समक्ष मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ के कार्यमॉडल, नवाचार और जनभागीदारी की कहानी को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक सराहा गया। उप मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मुख्यमंत्री जी ने समिट के दूसरे दिन प्रदेश के जल संरक्षण, नवाचार और जनभागीदारी मॉडल पर करीब 30 मिनट का विस्तृत प्रस्तुतिकरण भी दिया था। पूरे देश के सामने छत्तीसगढ़ के मॉडल को मिली यह सराहना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का ऐतिहासिक क्षण है।
सम्मेलन के "कैच द रेन" सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रदेश में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल सहित देशभर के राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे- इतने बड़े राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की भागीदारी और सराहना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
इतिहास रचा, क्रिटिकल ब्लॉक्स की संख्या हुई पूरी तरह ZERO ..
प्रदेश के लिए यह सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि रही कि भूजल दोहन के आधार पर चिन्हित जल संकटग्रस्त (क्रिटिकल एवं सेमी-क्रिटिकल) ब्लॉक्स की संख्या 26 से घटकर मात्र 19 रह गई है, और सभी 5 क्रिटिकल ब्लॉक्स को पूरी तरह शून्य (ZERO) कर दिया गया है- जो छत्तीसगढ़ के जल इतिहास में पहली बार हुआ है। यह उपलब्धि जल संसाधन विभाग सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो के कार्यकाल में विभाग की सतत मेहनत, दूरदर्शी योजना और मैदानी अमले के समन्वय का सीधा परिणाम है।
आंकड़े बोलते हैं: छत्तीसगढ़ की शानदार सफलता ..
तीनों चरणों को मिलाकर अब तक प्रदेश में 28 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण एवं पंजीयन छत्तीसगढ़ के जल इतिहास का अपने-आप में एक रिकॉर्ड।
जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 1.0: 4,05,561 जल संरचनाओं का निर्माण, देश में दूसरा स्थान। बालोद, महासमुंद व बिलासपुर जिलों तथा रायपुर नगर निगम को अपनी-अपनी श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार।
JSJB 2.0: कुल 24,07,456 संरचनाएं (23,07,768 पूर्ण), देश में दूसरा स्थान। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम 5 जिले देश के टॉप-10 में, जो किसी भी अन्य राज्य से सबसे अधिक है।
"कैच द रेन" - JSJB (जारी) अब तक 79,775 संरचनाएं दर्ज (77,719 पूर्ण) छत्तीसगढ़ फिलहाल देश में नंबर-1 पर।
कोरिया जिले का "5 प्रतिशत मॉडल" राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बना, जिसके तहत किसान स्वेच्छा से अपनी भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा जल पुनर्भरण संरचनाओं के लिए समर्पित कर रहे हैं।
प्रदेश में 100 प्रतिशत जिलों की भागीदारी के साथ अभियान एक सच्चा जनआंदोलन बन चुका है। राष्ट्रीय लक्ष्य 31 मई 2027 तक 2 करोड़ नई जल संरचनाएं बनाने का है, जिसमें छत्तीसगढ़ अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
-सीएम साय ने दी दिशा: हर राज्य का हो अपना "कैच द रेन प्लान" ..
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय मंच पर सिर्फ छत्तीसगढ़ की सफलता ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए दूरदर्शी सुझाव भी दिए हर राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार अलग "कैच द रेन प्लान तैयार करे, बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए "स्टेट वाटर अवार्डस" शुरू किए जाएं, BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग को और मजबूत किया जाए, तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन माह में अभियान की समीक्षा हो। मुख्यमंत्री जी के इन व्यावहारिक सुझावों को सम्मेलन में विशेष सराहना मिली, जो दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ अब राष्ट्रीय जल नीति की दिशा तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्या कहा- "राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ को मिली यह जिम्मेदारी अपने गांव में पानी रोकने वाले हर हाथ का सम्मान है। हमारे किसानों, माताओं-बहनों और युवाओं ने प्रधानमंत्री के कैच द रेन' आह्वान को जनआंदोलन बना दिया है, और हम उनकी आवाज राष्ट्रीय मंच तक लेकर जा रहे हैं। जल-सुरक्षित भारत से ही विकसित भारत 2047 का रास्ता तय होगा, और छत्तीसगढ़ इस यात्रा में देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है।"
मुख्यमंत्री श्री साय ने भावुक होते हुए यह भी बताया कि वे स्वयं एक किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं, इसलिए किसान के जीवन में पानी की अहमियत को उन्होंने बहुत करीब से महसूस किया है। यही वजह है कि उन्होंने जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सच्चा जनअभियान बनाकर छत्तीसगढ़ की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा है।
पूरे प्रदेश में हर्ष और गर्व की लहर! ..
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और जल संसाधन विभाग सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो के समर्पित एवं दक्ष प्रशासन के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ आज देश के सामने जल संरक्षण के एक रोल मॉडल राज्य के रूप में खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय डेलिगेशन के समक्ष छत्तीसगढ़ को मिली यह सराहना प्रदेश के प्रत्येक किसान, ग्राम पंचायत और जल-योद्धा के परिश्रम का सम्मान है, और आगामी वर्षों में "जल-सुरक्षित एवं समृद्ध छत्तीसगढ़" के संकल्प की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
आगे भी जारी रहेगी यह रफ्तार ..
विभाग के अनुसार अब आगामी लक्ष्य 31 मई 2027 तक तय राष्ट्रीय संख्य को पार करते हुए छत्तीसगढ़ को देश के सबसे जल-सुरक्षित राज्यों में शुमार कराना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से इस जनआंदोलन को और गति देने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत, किसान और नागरिक की भागीदारी ही छत्तीसगढ़ को जल-सुरक्षित एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प तक पहुंचाएगी।
शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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