दुर्ग-भिलाई

पॉलीटेक्निक के नवप्रवेशी स्टूडेंट ने जाना अपने संस्थान को, दुर्ग-भिलाई का इतिहास भी समझा

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-उदय प्रसाद उदय शासकीय पॉलीटेक्निक दुर्ग में तीन सप्ताह का परिचयात्मक कार्यक्रम शुरू  

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दुर्ग। उदय प्रसाद उदय शासकीय पॉलिटेक्निक, दुर्ग में 10 अगस्त से तीन सप्ताह तक आयोजित होने वाले परिचयात्मक (इंडक्शन) कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य प्रकाश कुमार पाण्डेय ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशी विद्यार्थियों को संस्था के शैक्षणिक माहौल, उपलब्ध सुविधाओं, अनुशासन तथा सर्वांगीण विकास के अवसरों से परिचित कराना है। 
पहले दिन प्राचार्य प्रकाश कुमार पाण्डेय ने स्टूडेंट का स्वागत करते हुए उन्हें उच्च शिक्षा के इस नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह तीन सप्ताह का कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, संवाद कौशल और आपसी संबंध मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनके लिए यह गर्व की बात है कि क्वालिटी काउंसिल ऑफ इण्डिया द्वारा संस्था को राज्य के 39 पॉलिटेक्निक में प्रथम स्थान प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि संस्था का प्लेसमेंट 70 से 80 प्रतिशत तक प्रतिवर्ष रहता है। 31 अगस्त तक चलने वाले तीन सप्ताह के इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा प्रेरक व्याख्यान आयोजित होंगे, जिससे छात्र अपने करियर के प्रति जागरूक हो सकें। इस दौरान  प्रथम सेमेस्टर प्रभारी डॉ. रचना सिंह ने संस्थान की जानकारी एक पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत की। इस अवसर पर सभी विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य माया सिंह, डॉ. काजल परगनिहा, डॉ. अर्चना साहू, डॉ. सतीश चन्द्रवंशी, सीमा दिल्लीवार, उषा गुप्ता और अरुणेश आत्मपूज्य सहित लगभग 300 छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे। एनएसएस कार्यकर्ताओं का आयोजन को सफल बनाने में विशेष सहयोग रहा।
-पॉलीटेक्निक कहलाता था शासकीय विविध शिल्पकला मंदिर, रोचक इतिहास से हुए रूबरू  
दुर्ग पॉलिटेक्निक के परिचयात्मक कार्यक्रम की श्रृंखला में दूसरे दिन 11 अगस्त का सत्र दुर्ग जिला और इस्पात नगरी भिलाई के इतिहास पर केंद्रित रोचक प्रस्तुतिकरण के नाम रहा।  लेखक-पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन ने स्टूडेंट से संवाद करते हुए दुर्ग जिले के स्थापना काल की जुड़ी कई रोचक जानकारी दी। 
दुर्ग पॉलिटेक्निक की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि स्थापना काल में इसे शासकीय विविध शिल्पकला मंदिर (पॉलीटेक्निक) के नाम से जाना जाता था। इसका उद्घाटन 14 जुलाई 1962 को अपने भिलाई प्रवास के दौरान तत्कालीन इस्पात मंत्री चिदंबरम सुब्रमण्यम ने किया था। हरित क्रांति के प्रणेता सुब्रमण्यम को साल 1998 में भारत रत्न से विभूषित किया गया था। 
अपने प्रस्तुतीकरण में मुहम्मद जाकिर हुसैन ने स्टूडेंट को 1955 में भारत एवं सोवियत संघ (रूस) के सहयोग से स्थापित भिलाई इस्पात संयंत्र की दुर्लभ तस्वीरों-वीडियो के माध्यम से रोचक जानकारी दी। साथ ही उन्होंने सिविल इंजीनियिरंग के स्टूडेंट को 1907 में बिना सीमेंट के चूना, रेत और फलों के गूदे से बने दुर्ग कलेक्ट्रेट भवन निर्माण की जानकारी दी। वहीं कालांतर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदय प्रसाद उदय के सम्मान में पॉलीटेक्निक के नामकरण और महात्मा गांधी के दुर्ग प्रवास से जुड़े प्रसंगों की भी जानकारी दी। अंत में पॉलीटेक्निक परिवार की ओर से लेखक-पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन का सम्मान किया गया। 

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