होम / दुर्ग-भिलाई / बसंत मोदी के जीवन से सेवा और सद्भाव की प्रेरणा लें : मनोरमा दीदी
दुर्ग-भिलाई
-आनंद सरोवर में श्रद्धांजलि सभा, एक हजार से अधिक लोगों ने नम आंखों से किया स्मरण

दुर्ग। बघेरा स्थित आनंद सरोवर में शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी एवं मोदी स्टोर के संचालक बसंत कुमार मोदी के आकस्मिक देहावसान पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी (प्रयागराज) विशेष रूप से उपस्थित हुईं। उन्होंने स्व. बसंत मोदी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन, आध्यात्मिक निष्ठा और सेवाभावी व्यक्तित्व को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। श्रद्धांजलि सभा में मोदी परिवार सहित एक हजार से अधिक लोग उपस्थित रहे।
मनोरमा दीदी ने कहा कि बसंत कुमार मोदी जी दुर्ग में ब्रह्माकुमारीज की सेवा के प्रारंभिक दौर के प्रथम विद्यार्थियों में रहे। संस्था से संपर्क में आते ही उन्हें परमात्म ज्ञान और राजयोग के प्रति गहरी आस्था हो गई थी। उन्होंने जीवनभर अपने इस विश्वास को बनाए रखा। दीदी ने कहा कि चलना तो सभी जानते हैं, लेकिन चलते-चलते रहनुमा बन जाना और आगे बढ़कर नेतृत्व संभाल लेना बड़ी बात है। बसंत मोदी जी ने अपने जीवन से इसका उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि मोदी जी का देहावसान अत्यंत आकस्मिक था। वे लोगों से मिलते-जुलते, बातचीत करते और जीवन के अनुभव साझा करते हुए अचानक विदा हो गए। उनके व्यक्तित्व को याद करते हुए दीदी ने कहा, “बड़े शौक से सुन रहा था जमाना, तुम ही सो गए दास्तां कहते-कहते।”
मनोरमा दीदी ने कहा कि संसार की नश्वरता को सभी जानते हैं। हर व्यक्ति को एक दिन इस शरीर को छोड़ना है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हम अपने जीवन में ऐसा क्या करके जाएं, जिससे हमारे जाने के बाद भी लोग हमें याद करें और हमारे जीवन से प्रेरणा लें। कुछ लोग जीवन की यात्रा पूरी करके चले जाते हैं, जबकि कुछ अपने श्रेष्ठ कर्मों से ऐसी छाप छोड़ जाते हैं कि उनके जाने पर समाज उन्हें विशेष रूप से स्मरण करता है।
उन्होंने कहा कि हमें यह मालूम नहीं कि जीवन की शाम कब ढल जाएगी, लेकिन यह हमारे हाथ में है कि उस शाम तक पहुंचने के लिए हमने कौन-सा मार्ग चुना है। परमात्मा ने मनुष्य को विवेक दिया है, जिससे वह सत्य और असत्य को पहचान सके तथा अपने जीवन के उद्देश्य को समझ सके।
मनोरमा दीदी ने कहा कि किसी जरूरतमंद की मदद करना, किसी के जीवन में सहयोग देना और किसी के हृदय से निकली दुआ प्राप्त करना जीवन की सबसे बड़ी कमाई है। उन्होंने कहा, “जब कोई चीज काम नहीं करती, तब दुआएं काम करती हैं।” इसलिए जीवन में धन-संपत्ति के साथ-साथ दुआओं और शुभकामनाओं की पूंजी भी अर्जित करनी चाहिए।
55 वर्षों से आध्यात्मिक सेवा में समर्पित मनोरमा दीदी ..
ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी विगत 55 वर्षों से ईश्वरीय सेवाओं में समर्पित हैं। वर्तमान में वे प्रयागराज सहित उत्तर प्रदेश की सब-जोन इंचार्ज तथा धार्मिक प्रभाग की राष्ट्रीय चेयरपर्सन के रूप में सेवाएं दे रही हैं। हिन्दी साहित्य में स्नातक मनोरमा दीदी हिन्दी एवं उर्दू भाषा पर समान अधिकार रखती हैं तथा आध्यात्मिक, सामाजिक और साहित्यिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देती रही हैं। कुंभ, सर्वधर्म सम्मेलन तथा विभिन्न जनजागरण अभियानों में उनके नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कोरोना काल एवं कुंभ सेवाओं के लिए उन्हें लंदन एक्सीलेंस सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
ब्रह्माकुमारीज परिवार सहित गणमान्य लोग रहे मौजूद ...
श्रद्धांजलि सभा में सविता दीदी, किरण दीदी रायपुर, प्रीति दीदी, पूजा दीदी भिलाई, श्रद्धा दीदी प्रयागराज, गुरमुख दास कलवानी रायपुर, रीटा दीदी संचालिका ब्रह्माकुमारीज दुर्ग एवं रूपाली दीदी दुर्ग सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और ब्रह्माकुमारीज परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने स्व. बसंत मोदी जी के सरल स्वभाव, आध्यात्मिक निष्ठा, सहयोगी भावना एवं सेवाभावी व्यक्तित्व को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
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