-वर्षा जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अभिनव पहल
दुर्ग। कलेक्टर दुर्ग अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित "मोर गांव मोर पानी" अभियान के तहत जनपद पंचायत दुर्ग की ग्राम पंचायत नागपुरा में मनरेगा अंतर्गत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (जल संरक्षण एवं जल संवर्धन) के तहत विकसित आंवला बगीचे में लगभग 2000 जल अवशोषण ट्रेंच का निर्माण कर वर्षा जल संरक्षण का अनुकरणीय मॉडल विकसित किया गया है। इस अभिनव पहल से वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होने के साथ भू-जल पुनर्भरण, पर्यावरण संरक्षण तथा आंवला बगीचे की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
पूर्व में वर्षा ऋतु के दौरान आंवला बगीचे में गिरने वाला अधिकांश वर्षा जल बहकर नालों के माध्यम से नदी में चला जाता था, जिससे मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं रह पाती थी और पौधों की वृद्धि प्रभावित होती थी। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पौधों की कतारों के बीच वैज्ञानिक पद्धति से लगभग 2000 जल अवशोषण ट्रेंच का निर्माण कराया गया, जिससे वर्षा जल उसी स्थान पर रुककर धीरे-धीरे भूमि में समाहित हो सके।
तकनीकी सहायक दीप्ति सिंह द्वारा बताया गया प्रत्येक ट्रेंच की क्षमता लगभग 2 घन मीटर है। इस प्रकार एक बार की अच्छी वर्षा में लगभग 4000 घन मीटर जल का संरक्षण संभव है। यदि वर्षा ऋतु में ट्रेंच कई बार भरते हैं, तो अनुमानित 1.20 लाख घन मीटर वर्षा जल का भू-जल पुनर्भरण किया जा सकता है। इससे भू-जल स्तर में सुधार, मृदा संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा भविष्य में सिंचाई एवं पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।
इस कार्य पर लगभग 9.43 लाख रुपये (मजदूरी एवं सामग्री सहित) व्यय किए गए तथा 3612 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। निर्माण कार्य 25 मई 2026 से प्रारंभ होकर 30 जून 2026 को पूर्ण किया गया। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार मिला, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जनभागीदारी भी मजबूत हुई।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के ऐसे कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ग्राम पंचायत नागपुरा में विकसित यह मॉडल वर्षा जल के वैज्ञानिक प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नवाचार आधारित पहल अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा गौरव मिश्रा ने बताया कि ग्राम पंचायत नगपुरा में निर्मित लगभग 2000 जल अवशोषण ट्रेंच वर्षा जल के वैज्ञानिक प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन ट्रेंचों के माध्यम से वर्षा जल को उसी स्थान पर रोककर भूमि में समाहित किया जा रहा है, जिससे भू-जल पुनर्भरण, मिट्टी में नमी का संरक्षण तथा आंवला बगीचे की उत्पादकता में वृद्धि हो रही है। यह कार्य मनरेगा के तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की प्रभावी पहल है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी प्राप्त हुआ है।
ग्राम पंचायत नागपुरा का यह मॉडल मनरेगा के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण आजीविका के समन्वित विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है तथा अन्य ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हो रहा है।
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