
हरिद्वार/ऋषिकेश (पुरेंद्र देशमुख)। छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित उत्तराखंड अध्ययन एवं भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 20 पत्रकारों का दल इन दिनों उत्तराखंड की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों का अवलोकन कर रहा है। यात्रा का दूसरा दिन हरिद्वार, ऋषिकेश और देवप्रयाग के दर्शन, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक अनुभूतियों से भरपूर रहा, जिसे सभी पत्रकारों ने अविस्मरणीय बताया।
भ्रमण दल ने एक जुलाई को देहरादून पहुंचने के बाद शाम को हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध हर की पैड़ी (त्रिवेणी घाट) में भव्य गंगा आरती में भाग लेकर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंत्रोच्चार, दीपों की रोशनी और श्रद्धालुओं की आस्था से सराबोर वातावरण ने सभी को भाव-विभोर कर दिया। रात्रि विश्राम के बाद दूसरे दिन सुबह नाश्ते के पश्चात दल योगनगरी ऋषिकेश के लिए रवाना हुआ।
नीम करौली बाबा आश्रम में लिया आशीर्वाद ...
हरिद्वार से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित ऋषिकेश पहुंचने पर दल के साथ स्थानीय गाइड अनुराग जुड़े। उन्होंने पूरे भ्रमण के दौरान विभिन्न धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों की महत्वपूर्ण जानकारी दी।
सबसे पहले पत्रकारों का दल प्रसिद्ध संत नीम करौली बाबा के धाम पहुंचा। यहां बाबा द्वारा स्थापित श्री हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन कर सभी ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। आश्रम में संचालित सेवा कार्यों और सामाजिक गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की गई।

वीरभद्र महादेव मंदिर में किया जलाभिषेक ...
इसके बाद दल प्राचीन एवं ऐतिहासिक वीरभद्र महादेव मंदिर पहुंचा। धार्मिक मान्यता है कि इस शिवलिंग का महत्व नीलकंठ महादेव के समान माना जाता है। यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। पत्रकारों ने शिवलिंग का जलाभिषेक कर छत्तीसगढ़ की खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की।
इसी दौरान एक रोचक घटना भी हुई। मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय दल के एक वरिष्ठ पत्रकार की चरण पादुका (चप्पल) कहीं गुम हो गई। काफी तलाश के बाद भी वह नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने बिना किसी शिकायत के लगभग पांच किलोमीटर तक नंगे पैर यात्रा जारी रखी। बाद में बाजार खुलने पर नई पादुका की व्यवस्था की गई। इस घटना ने उनकी आस्था और उत्साह को और भी यादगार बना दिया।
पहाड़ों के बीच देवप्रयाग की मनोहारी यात्रा ...
लगभग 11 बजे पत्रकारों का दल ऋषिकेश से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित देवप्रयाग के लिए रवाना हुआ। घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर बस चालक ने अत्यंत सावधानी और कुशलता का परिचय देते हुए सुरक्षित यात्रा कराई।
रास्ते भर बादलों से घिरे पर्वत, ऊंची चोटियों से गिरते झरने, हरियाली और कल-कल बहती नदियों का मनोरम दृश्य सभी को मंत्रमुग्ध करता रहा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रकृति ने पहाड़ों को मोतियों की माला से सजा दिया हो।
देवप्रयाग पहुंचकर पत्रकारों ने उस अद्भुत संगम का दर्शन किया जहां लगभग एक हजार फीट नीचे अलकनंदा और भागीरथी नदियां एक-दूसरे से मिलती हैं। यहां दोनों नदियों के जल का रंग स्पष्ट रूप से अलग दिखाई देता है। भागीरथी का जल हल्का हरा जबकि अलकनंदा का जल दूधिया आभा लिए हुए नजर आता है। दोनों के संगम के बाद ही पवित्र गंगा नदी का उद्गम माना जाता है। यह दृश्य सभी के लिए अत्यंत रोमांचकारी और आध्यात्मिक अनुभूति से भर देने वाला रहा।

लक्ष्मण झूला, राम झूला और गंगा आरती का लिया आनंद ...
दोपहर बाद दल पुनः ऋषिकेश लौटा। जलपान के बाद प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन का क्रम शुरू हुआ। पत्रकारों ने लक्ष्मण मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद लक्ष्मण झूला का अवलोकन किया, जो वर्तमान में आवागमन के लिए बंद है। वहीं समीप स्थित नव-निर्मित जानकी (हनुमान) झूला से होकर सभी ने गंगा पार की।
इसके बाद श्रीराम मंदिर, गीता भवन सहित अनेक धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया। शाम को गंगा तट पर आयोजित भव्य गंगा आरती में शामिल होकर सभी ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। आरती के पश्चात राम झूला पार कर दल अपने गंतव्य के लिए रवाना हुआ।
खोया-पाया केंद्र की व्यवस्था ने खींचा ध्यान ..
भ्रमण के दौरान एक और रोचक दृश्य देखने को मिला। गीता भवन और राम झूला की ओर जाते समय लाउडस्पीकर पर एक बिछड़े हुए व्यक्ति की सूचना प्रसारित की जा रही थी। आगे बढ़ने पर पुलिस द्वारा संचालित 'खोया-पाया केंद्र' दिखाई दिया, जहां बिछड़े लोगों की जानकारी दर्ज करने की सुव्यवस्थित व्यवस्था थी। पत्रकारों ने इसकी सराहना करते हुए इस व्यवस्था का अवलोकन किया और तस्वीरें भी लीं।
जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में सफल रहा भ्रमण ...
पूरे भ्रमण के दौरान जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक धनंजय राठौर, उप संचालक लक्ष्मीकांत कोसरिया, सहायक विष्णु वर्मा तथा सहायक जनसंपर्क अधिकारी तेजबहादुर सिंह भुवाल और नितेश चक्रधारी के मार्गदर्शन एवं अनुभव का लाभ पत्रकारों को मिला। अधिकारियों द्वारा निर्धारित समय-सारिणी के अनुरूप यात्रा का सफल संचालन किया गया।
पत्रकारों ने कहा कि उत्तराखंड की यह यात्रा केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और व्यवस्थाओं को निकट से जानने-समझने का भी अवसर मिला। हरिद्वार, ऋषिकेश और देवप्रयाग की यह यात्रा सभी के लिए जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बन गई। आगामी दिनों में भ्रमण दल उत्तराखंड के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भी अध्ययन एवं अवलोकन करेगा।
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