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Breaking: मंत्रिपरिषद के बड़े फैसले: ग्रामीण रोजगार, आजीविका और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने तीन अहम योजनाओं को मंजूरी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, डिजिटल सुशासन और स्वच्छ ऊर्जा को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नई रोजगार गारंटी व्यवस्था, स्थानीय आजीविका को मजबूत करने तथा कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने संबंधी नीतियों को मंजूरी दी गई।
-ग्रामीण रोजगार को नई दिशा: ‘वीबी-जी राम जी योजना’ को मंजूरी ..
मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सशक्तीकरण और विभागीय योजनाओं के बेहतर अभिसरण के उद्देश्य से “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़” के प्रारूप को स्वीकृति दी।
भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के अनुरूप लागू की जाने वाली इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी।
योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत संरचना निर्माण, आजीविका आधारित परिसंपत्तियों का विकास तथा टिकाऊ रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाएगा। इसके साथ ही ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास मॉडल, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और पीएम गति शक्ति के साथ समन्वय पर भी विशेष जोर रहेगा।
राज्य सरकार ने योजना के प्रभावी संचालन के लिए डिजिटल निगरानी, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी प्रशासनिक प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया है, जिससे जवाबदेही और सुशासन को मजबूत किया जा सके।
योजना के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य सरकार का व्यय अनुपात 60:40 रहेगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
-‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ से गांवों में बढ़ेंगे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर ...
कैबिनेट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार करने के उद्देश्य से “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना शुरू करने का भी निर्णय लिया।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बहुउद्देश्यीय आजीविका केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिनमें—
सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई, सिलाई, हस्तशिल्प),
प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल, डेयरी),
सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत, अटल डिजिटल केंद्र), विपणन एवं आपूर्ति केंद्र शामिल होंगे।
योजना का उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना और मशीनरी का अधिकतम उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा और विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
इस योजना के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
सरकार का मानना है कि इस पहल से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल सेवाओं, हरित ऊर्जा और ग्रामीण बाजार व्यवस्था को नई गति मिलेगी।
-हरित ऊर्जा को बढ़ावा: ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026’ को मंजूरी ...
मंत्रिपरिषद ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” के प्रारूप को भी मंजूरी प्रदान की।
नई नीति के तहत राज्य में उपलब्ध कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट तथा अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें स्वच्छ ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में परिवर्तित किया जाएगा।
सरकार के अनुसार इस नीति से अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाने, पर्यावरण संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने और जैव उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया आधार मिलेगा।
छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष सीबीजी उत्पादन की संभावना आंकी गई है।
नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य नोडल एजेंसी बनाया गया है तथा ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
इन फैसलों को राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण विकास, रोजगार विस्तार और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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