
दुर्ग। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बघेरा स्थित आनंद सरोवर के "कमला दीदी" सभागार में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग शिक्षक डॉ. नारायण चंद्राकर के सानिध्य में सभी भाई-बहनों ने योग किया। डॉ नारायण चंद्रकार ने उपस्थित सभी लोगों को योग का महत्व बताया तथा अपने जीवन का अनुभव बताया कि किस प्रकार लोगों की अनेक बीमारियां योग के माध्यम से ठीक हुई ।
ब्रह्माकुमारीज़ दुर्ग की डायरेक्टर रीटा दीदी ने योग दिवस पर सभी को अपनी शुभाशीष देते हुए कहा कि
आज सारे विश्व के अंदर 177 देश में इंटरनेशनल डे आफ योगा के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है इस दिन को विशेष इसीलिए चुना गया है कि वर्ष का सबसे लंबा दिन 21 जून को माना जाता है । 22 जून से फिर सूर्य दक्षिणायन की तरफ अपनी यात्रा प्रारंभ करता है इस दिन के लिए कहा जाता है कि व्यक्ति का मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन इस दिन संतुलित होता है । संतुलन जीवन के अंदर बहुत आवश्यक है और योग के माध्यम से ही व्यक्ति संतुलन को बनाए रख सकता है इसलिए परमात्मा ने भी जब श्रीमद्भगवद्गीता में अर्जुन को योग सिखाया तो उसमें विशेष उन्हें यही प्रेरणा दी, कि हे.. अर्जुन योग का अर्थ ही है स्वयं को सुसंस्कृत करना,अपनी इंद्रियों के ऊपर अधिकार प्राप्त करना। क्योंकि व्यक्ति जब इंद्रियों पर अधिकार प्राप्त करता है तभी व्यक्ति अपना मानसिक,भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन सहज बना सकता है। परिवर्तन के प्रक्रिया के अंदर आवश्यकता है कि व्यक्ति अपने आध्यात्मिक जागृति के माध्यम से परिवर्तन को सहजता से अपना सके और भावनात्मक स्तर पर भी परिपक्वता प्राप्त सके। आज सभी अपने जीवन के अंदर योग की उत्कृष्टता को हासिल करें ताकि अपने जीवन के अंदर सहज संतुलन ले आ सके। योग माना ही संतुलन। भौतिकता के साथ-साथ आध्यात्मिकता इन दोनों का संतुलन जरूरी है। कर्म और योग के बीच का संतुलन आवश्यक है व्यवहार और परमार्थ के बीच का संतुलन जरूरी है ।
मंच संचालन करते हुए ब्रह्माकुमारी रूपाली दीदी ने योग दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दी व सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया ।
संपादक- पवन देवांगन
पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)
ई - मेल : dakshinapath@gmail.com
मो.- 9425242182, 7746042182
हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।
सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved
Powered By Global Infotech.