दुर्ग-भिलाई

रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम पर निगम की नजर, बंद मिलने पर निगम करेगा कार्यवाही 

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-आयुक्त के निर्देश पर रिसाली में किया जा रहा सर्वे
रिसाली।
आवासों और व्यावसायिक परिसर में बने वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की निगम जांच करेगा। वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बंद या फिर कंडम होने पर नगर पालिक निगम रिसाली प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही करेगा। इसके लिए आयुक्त मोनिका वर्मा न केवल टीम का गठन की है, बल्कि सूची के आधार पर जल संरक्षरण के लिए बनाए सोक पिट का सत्यापन भी करा रही है। 
    नगर पालिक निगम रिसाली की आयुक्त मोनिका वर्मा ने निर्धारित माप दण्डों पर तैयार वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का सत्यापन करने का निर्देश दी है। आयुक्त ने बताया कि वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बंद या फिर कंडम मिलने पर नियमानुसार वे कार्यवाही भी करेंगी। उन्होंने ने बताया कि वर्तमान समय में शासन लगातार जल संरक्षण को लेकर गंभीर है। शासन के निर्देश पर ही पूरे क्षेत्र में वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच की जा रही है। भवन निर्माण के समय सशर्त दी गई अनुज्ञप्ति के अनुसार जल संरक्षण के लिए कदम उठाया जाना निर्धारित है। अगर किसी प्रकार की कोताही बर्ती गई तो पहले समझाइश दी जाएगी अन्यथा की स्थिति में कार्यवाही किया जाना प्रस्तावित है। आयुक्त मोनिका वर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि घर अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थल पर बने वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को बारिश के पूर्व सभी संधारित कर लंे।
क्यों आवश्यक है-
वर्तमान समय में भूमिगत जल स्रोत लगातार गिरते जा रहा है। पेयजल अथवा निस्तारी के लिए पानी की आपूर्ति करना एक चुनौति के रूप में सामने खड़ा हुआ है। यही वजह है कि आने वाले समय में पेयजल बाधित न हो इसके लिए बारिश के पानी को संरक्षित कर भूमिगत जल के स्रोत को बढ़ाने देशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत घर अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक जगहों पर वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण प्राथमिकता के साथ कराया जा रहा है।
बारिश के पूर्व करें सफाई
निगम आयुक्त मोनिका वर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि नागरिकों द्वारा बनाए घरों अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बने वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई कर उसे चालू करना बेहद आसान है। उन्हांेने ने बताया कि आमतौर पर दो स्तर पर वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है। पहला बारिश के पानी को सीधे तौर पर बोर अथवा कुंआ में डालकर संरक्षित किया जाता है। वहीं दूसरी पद्धति में बारिश के पानी को भूमिगत करने सिस्टम तैयार किया जाता है। इस प्रणाली में मिट्टी, गिट्टी, रेत व चारकोल का उपयोग किया जाता है। छः माह से अधिक समय होने पर नागरिक चारकोल के ऊपर बिछाए जाली को पहले साफ करे, इसके बाद बारिश के पानी को सिस्टम तक लाने बिछाए गए पाइप लाइन सफाई कर उपरी सतह पर जमे मिट्टी को हटा दे। इससे सिस्टम बारिश में अच्छे से काम करता है।

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