दुर्ग

गैस मूल्य वृद्धि पर अरुण वोरा बोले— "महंगाई की आग अब हर रसोई तक पहुंच चुकी है"

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दुर्ग। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में एक बार फिर 29 रुपये की वृद्धि होने पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने महंगाई को जनता की नियति मान लिया है। रसोई गैस, खाद्य तेल, दाल, सब्जियां और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। आम परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा केवल घर चलाने में खर्च करने को मजबूर है। भाजपा सरकार महंगाई पर नियंत्रण करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
अरुण वोरा ने कहा कि पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है।आज देश की गृहिणियां सबसे ज्यादा परेशान हैं।घरेलू गैस की कीमतें पिछले 12 वर्षों में लगभग 530 रुपये तक बढ़ चुकी हैं.गैस महंगी, सीएनजी महंगी, कमर्शियल सिलेंडर महंगा और परिवहन खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो रही हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, मजदूर, किसान, छोटे व्यापारी और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया संकट के दौरान 41 देशों से ईंधन आपूर्ति के विविधीकरण को लेकर बड़े दावे किए थे। यदि सरकार ने इतने व्यापक स्तर पर वैकल्पिक ईंधन स्रोतों की व्यवस्था कर ली थी, तो आज गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि क्यों हो रही है? यदि सरकार की नीतियां इतनी सफल हैं तो आम आदमी को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी एलपीजी की उपलब्धता और रिफिलिंग की समस्या क्यों बनी हुई है?
अरुण वोरा ने केंद्र सरकार से प्रश्न पूछते हुए कहा कि आखिर 41 देशों से ईंधन आयात की रणनीति का परिणाम क्या निकला? आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की कमी और वितरण संबंधी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं? और सबसे महत्वपूर्ण, उज्ज्वला योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 5.56 करोड़ परिवारों ने एक भी गैस रिफिल नहीं कराया अथवा केवल एक बार ही रिफिल कराया, जबकि इनमें से 3.30 करोड़ परिवारों ने एक भी सिलेंडर रिफिल नहीं कराया। भाजपा सरकार गरीबों को गैस कनेक्शन देकर फोटो खिंचवाती है और फिर इतनी महंगी गैस बेचती है कि वही गरीब परिवार उसे दोबारा भरवा नहीं पाता.यह स्थिति पश्चिम एशिया संकट से पहले की है, जिससे स्पष्ट होता है कि गरीब परिवार महंगी गैस खरीदने में असमर्थ हैं। यह भाजपा सरकार की गलत नीतियों और मुनाफाखोरी का परिणाम है.यह कल्याणकारी योजना नहीं बल्कि दिखावटी राजनीति का उदाहरण है। यदि उज्ज्वला योजना वास्तव में सफल होती तो करोड़ों परिवारों को रिफिल कराने से पीछे नहीं हटना पड़ता। गरीब परिवार मजबूरी में फिर लकड़ी, कोयला और पारंपरिक ईंधन की ओर लौट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में प्रदेश की जनता को 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का वादा किया था, भाजपा सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जनता को 500 रुपये में सिलेंडर देने का वादा केवल वोट लेने के लिए किया गया था या उसे पूरा करने की कोई गंभीर मंशा भी थी।
अरुण वोरा ने कहा कि आज आम आदमी की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि महंगाई की रफ्तार बढ़ रही है, लेकिन आम नागरिक की आय उसी गति से नहीं बढ़ रही.यदि कोई व्यक्ति यह सोचता है कि कम खर्च करके या कुछ पैसे बचाकर अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर लेगा, तो बढ़ती महंगाई उसकी सारी गणना बिगाड़ देती है. नतीजा यह है कि गरीब परिवार आर्थिक दबाव के दुष्चक्र में फंसते जा रहे हैं।सबसे बड़ी चिंता यह है कि परिणामस्वरूप परिवार भविष्य की सुरक्षा को दांव पर लगाकर वर्तमान का खर्च चला रहे हैं.जब परिवार अपने भविष्य की योजनाएं बनाने के बजाय महीने का खर्च निकालने की चिंता में डूब जाए,तो यह किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए।"

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