सक्ती। वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 12 मजदूर अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इस गंभीर घटना के बाद केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर जांच समितियों का गठन किया गया है। वहीं पुलिस ने प्लांट के चेयरमैन सहित 19 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है।
घटना को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने मामले की जांच के लिए अपनी 10 सदस्यीय टीम गठित की है। इसी बीच कांग्रेस के पूर्व मंत्री ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि दर्ज की गई एफआईआर केवल औपचारिकता है। उनका कहना है कि पुलिस ने जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया है, जबकि इस तरह की गंभीर घटना में सख्त और गैर-जमानती धाराएं लगनी चाहिए थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले को संवेदनशील बताकर जानकारी छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं सांसद प्रतिनिधि ने जिला प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे से पहले स्थानीय सांसद द्वारा तीन बार जिला कलेक्टर को प्लांट की सुरक्षा जांच और निरीक्षण के लिए पत्र लिखा गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका दावा है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपायों पर ध्यान दिया गया होता, तो इतनी बड़ी दुर्घटना टाली जा सकती थी। फिलहाल मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी है, लेकिन इस हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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