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देश की आज़ादी में "पुष्प की अभिलाषा" जैसी कविताओं की भी थी भूमिका

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-राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की जन्मस्थली को प्रणाम कर लौटे डॉ. शर्मा, बिलासपुर जेल में लिखी थी प्रसिद्ध रचना  "पुष्प की अभिलाषा"
भिलाई।
इस्पात नगरी भिलाई के साहित्य - संस्कृति के आचार्य डॉ.महेशचन्द्र शर्मा ने विगत दिनों प्रवास के दौरान भारतीय आत्मा के नाम से प्रसिद्ध राष्ट्रवादी कवि पं.माखन लाल चतुर्वेदी की जन्मस्थली में उनकी प्रतिमा के दर्शन किए। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम् (होशंगाबाद) के पास बाबई नाम का क़स्बा है जो "माखन नगर" कहलाता है। डॉ.शर्मा ने बताया कि यहाॅं पहुॅंचने पर विशेष प्रसन्नता और सन्तोष का अनुभव हुवा।
ज्ञातव्य है कि राष्ट्रभक्त कवि एवं वरिष्ठ पत्रकार पं.माखन लाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध देशभक्ति पूर्ण और कालजयी कविता "पुष्प की अभिलाषा - चाह नहीं मैं सुर बाला के गहनों में गूॅंथा जाऊॅं ..." की रचना का अभी शताब्दी वर्ष हुआ है। पं.चतुर्वेदी ने पांच जुलाई 1921 को बिलासपुर जेल में इसकी रचना की थी। वे असहयोग आन्दोलन के कारण बिलासपुर जेल में थे। गणेश शंकर विद्यार्थी ने इसे "प्रताप" में प्रकाशित किया। आचार्य डॉ.शर्मा ने माखन नगर से लौटने पर बताया कि उक्त कविता का जन्म बिलासपुर में हुआ अतः छत्तीसगढ़ को गौरव और गर्व का अनुभव होना स्वाभाविक है। वैसे तो कविता पूरे राष्ट्र की है परन्तु छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को विशेष रूप से जोड़ती है।
एक भारतीय आत्मा पं.माखन लाल चतुर्वेदी कर्मवीर और प्रताप जैसे समाचार पत्रों के प्रसिद्ध सम्पादक भी थे। ऐसे ही मनीषी  देशभक्त साहित्यकारों और पत्रकारों ने देश की बड़ी सेवा की। लोकमान्य पं.बालगंगाधर तिलक और राष्ट्रपिता महात्मा गान्धी आदि को भी इस सन्दर्भ में आदर्श और प्रेरक माना गया। पं. माखनलाल चतुर्वेदी ने "जवानी" और "जलियाॅंवाला की बन्दी" आदि अन्य देशभक्ति पूर्ण कविताओं की रचना की थी। निश्चित रूप से साहित्यिक पत्रकारिता लोगों को राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण से जोड़ती है।

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