होम / दुर्ग-भिलाई / पक्के पशु शेड से पशुपालन को मिली नई दिशा, मनरेगा योजना से अनारकली यादव बनीं आत्मनिर्भर
दुर्ग-भिलाई
दुर्ग। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत जिला दुर्ग के जनपद पंचायत दुर्ग की ग्राम पंचायत महमरा में एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहां श्रीमती अनारकली यादव को पशु शेड निर्माण कार्य से आजीविका को नई दिशा मिली है।
श्रीमती अनारकली यादव, पति रामेश्वर यादव, लंबे समय से पशुपालन एवं कृषि कार्य से जुड़ी हुई हैं। पूर्व में उनके पशुओं के लिए केवल कच्चा आश्रय उपलब्ध था, जिससे स्वच्छता एवं पशुओं की सुरक्षा में कठिनाइयां आती थीं। विशेषकर वर्षा ऋतु में पशुओं को सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण होता था।
कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत के निर्देशन में ग्राम पंचायत द्वारा उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए मनरेगा के तहत पशु शेड निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान की गई। इस कार्य के लिए 0.95 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई, जिसमें सामग्री पर 0.75 लाख रुपये तथा मजदूरी पर 0.085 लाख रुपये व्यय किया गया। निर्माण कार्य के दौरान कुल 32 मानव दिवस का सृजन हुआ।
पशु शेड निर्माण पूर्ण होने के बाद श्रीमती यादव के पशुपालन कार्य में उल्लेखनीय सुधार आया है। पहले उनके पास लगभग 11 पशु थे, जो अब बढ़कर लगभग 35 हो गए हैं। पक्का शेड बनने से पशुओं को सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण मिला है, जिससे उनके स्वास्थ्य एवं दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है।
वर्तमान में श्रीमती अनारकली यादव कृषि कार्य के साथ-साथ दुग्ध व्यवसाय भी कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है।
श्रीमती यादव ने बताया कि मनरेगा योजना के माध्यम से पशु शेड निर्माण होने से उनकी बड़ी चिंता दूर हो गई है और अब वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने इस सहयोग के लिए शासन एवं ग्राम पंचायत के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह उदाहरण दर्शाता है कि मनरेगा योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल रोजगार सृजन हो रहा है, बल्कि आजीविका के स्थायी साधनों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
“पशु शेड बनने से पहले अपने पशुओं की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता रहती थी। बरसात और सर्दी में उन्हें सुरक्षित रखना बहुत मुश्किल था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पक्का शेड बनाना संभव नहीं था।
मनरेगा योजना से शेड बनने के बाद अब पशुओं की संख्या और आय दोनों बढ़ी हैं। इसके लिए मैं शासन और ग्राम पंचायत की आभारी हूं।”पशु शेड निर्माण के बाद उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले—
पशुओं की संख्या 11 से बढ़कर 35 हो गई
पशुओं को सुरक्षित एवं स्वच्छ आश्रय मिला
पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार
दूध उत्पादन में वृद्धि
कृषि के साथ-साथ दुग्ध व्यवसाय से आय में वृद्धि
वर्तमान में श्रीमती अनारकली यादव को लगभग ₹2 लाख से अधिक वार्षिक आय प्राप्त हो रही है।
संपादक- पवन देवांगन
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