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दुर्ग में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल समापन, 10 लाख से अधिक प्रकरणों का हुआ निराकरण

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दुर्ग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय दुर्ग में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस गरिमामयी आयोजन का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के करकमलों से हुआ।
कार्यक्रम के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं दुर्ग जिले के पोर्टफोलियो जज नरेश कुमार चन्द्रवंशी की विशेष उपस्थिति रही। न्यायालय परिसर पहुंचने पर एनसीसी कैडेट्स के अनुशासित दस्ते ने मुख्य न्यायाधीश एवं पोर्टफोलियो जज की भव्य अगवानी करते हुए उन्हें मंच तक एस्कॉर्ट किया, जिससे समारोह की गरिमा और बढ़ गई।
‘सुलह से न्याय’ का संदेश ..
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि लोक अदालत केवल प्रकरणों का बोझ कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में “सुलह से न्याय” की भावना को मजबूत करने का एक प्रभावी मंच है। उन्होंने इस अवसर पर लोक अदालत के महत्व पर आधारित एक विशेष पंडवानी गीत का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम के दौरान जिला न्यायालय बार के सदस्यों की सांस्कृतिक एवं नुक्कड़-नाटक टीम ने न्यायालय परिसर में पंडवानी गायन और गीत की प्रस्तुति दी, जिसकी उपस्थित अतिथियों और अधिवक्ताओं ने सराहना की। कला के माध्यम से विधिक जागरूकता फैलाने के इस प्रयास को विशेष रूप से सराहा गया।
39 पीठों में हुई सुनवाई, रिकॉर्ड प्रकरणों का निराकरण ..
इस राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिला न्यायालय दुर्ग, परिवार न्यायालय तथा भिलाई-3, पाटन और धमधा के न्यायालयों में कुल 39 पीठों का गठन किया गया था।
लोक अदालत में कुल 10,13,826 प्रकरणों को समझौते के लिए रखा गया, जिनमें से 10,13,730 प्रकरणों का आपसी समझौते से सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इन प्रकरणों के निपटारे के माध्यम से 49,60,31,667 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई, जिससे वर्षों से लंबित विवादों का समाधान हुआ और पक्षकारों को त्वरित राहत मिली।
विभिन्न मामलों में मिली बड़ी सफलता ..
लोक अदालत में समझौता योग्य आपराधिक प्रकरण, दीवानी वाद, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण सहित अनेक मामलों का निराकरण किया गया। परिवार न्यायालय में काउंसलिंग के माध्यम से कई बिछड़े दंपत्तियों ने पुनः साथ रहने का निर्णय लिया।
इसके अलावा प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंक, बिजली और दूरसंचार से संबंधित कई मामलों का समाधान न्यायालय पहुंचने से पहले ही करा लिया गया।
तकनीक और नवाचार का उपयोग ..
लोक अदालत की कार्यवाही भौतिक और वर्चुअल दोनों माध्यमों से संचालित की गई। दूरस्थ क्षेत्रों के पक्षकारों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। वहीं मोबाइल अवेयरनेस वैन के जरिए वृद्ध एवं बीमार पक्षकारों को उनके घर पर ही लोक अदालत की प्रक्रिया से जोड़ा गया।
विधि विद्यार्थियों ने किया प्रत्यक्ष अवलोकन ..
जिले के विभिन्न विधि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी लोक अदालत की कार्यवाही में भाग लिया। उन्होंने विभिन्न पीठों में बैठकर समझौते की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया, जिससे उन्हें वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली (ADR) और न्यायिक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी मिली।
सेवा और सामाजिक सरोकार का भी उदाहरण
समारोह के दौरान न्यायालय परिसर में आए पक्षकारों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों के लिए एक समाजसेवी संस्था की ओर से निःशुल्क लंगर (भोजन) की व्यवस्था की गई। साथ ही केंद्रीय जेल दुर्ग के बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई तथा एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया।
अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन न केवल लंबित प्रकरणों के निराकरण में मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि आपसी भाईचारे और सेवा भावना के माध्यम से न्याय व्यवस्था के प्रति आमजन का विश्वास भी और मजबूत हुआ।

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