होम / अपराध / अपने खेत में अफीम सहित क्या फसल उगायेगा इसका निर्णय लेने का अधिकार सरकार को नहीं बल्कि किसानों को होना चाहिए - छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन
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दुर्ग। दुर्ग जिले के समोदा में अफीम की खेती करने वाले किसान के खिलाफ शासन प्रशासन की कार्यवाही पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक एड राजकुमार गुप्त और दुर्ग जिले के अध्यक्ष उत्तम चंद्राकर ने कहा है कि अफीम, गांजा, भांग आदि वैसे ही नैसर्गिक उपज है जैसे अनाज, दलहन, तिलहन आदि प्रकृति के नियम में इनकी खेती अवैध नहीं है। सरकार द्वारा बनाए गए कानून में अफीम, गांजा, भांग आदि की खेती करने को अवैध और गैर-कानूनी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के नेताओं ने इनकी खेती करने पर लगाये गये कानूनी प्रतिबंध को हटाये जाने की मांग की है।
सरकार किसानों की आमदनी को 6 साल में दो गुना नहीं कर सकी है लेकिन किसान खुद अपनी आमदनी बढ़ाने का प्रयास करे तो उसे अपराधी बना देते हैं।
किसान नेताओं ने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा है कि 2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने की बात कही थी जो 10 साल में नहीं किया जा सका है और यदि किसान खुद अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए अफीम, गांजा, भांग आदि की खेती करे तब इसे अवैध, गैर-कानूनी बताकर किसान को ही अपराधी बना देते हैं।
किसान संगठन के नेताओं ने आगे कहा है कि शराब का उत्पादन कारखानों में उद्योगपति द्वारा किया जाता है इसलिए उन्हें लाईसेंस परमिट देकर कानूनी बना दिया जाता है यदि अफीम, गांजा, भांग आदि का उत्पादन किसानों के खेत के बजाय उद्योगपति के कारखाने में होता तब ऐसा करना अवैध या गैरकानूनी नहीं होता।
खेतों के उपजों से ही शराब बनाया जाता है ...
किसान नेताओं का कहना है कि किसान के खेत में उपजे अंगूर, गन्ना, मक्का, धान आदि उपजों से शराब बनाया जाता है, यदि नशे के लिए उपयोगी अफीम, गांजा, भांग आदि की खेती करना अवैध है तब अंगूर, गन्ना, मक्का आदि की उपज लेना जिसका उपयोग शराब (नशा) बनाने में किया जाता है वह अवैध और गैर-कानूनी क्यों नहीं है?
दुर्ग जिले के समोदा में अफीम की खेती करने वाले किसान का पक्ष लेते हुए छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के नेताओं ने कहा है ऐसा करके उसने किसानों का मार्गदर्शन किया है कि खेती से आमदनी कैसे बढ़ाई जा सकती है, भाजपा और कांग्रेस पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए किसान नेताओं ने कहा है कि कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है वहीं भाजपा दबाव में आकर उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही कर रहे हैं। दोनों दलों की सरकारें किसानों की आर्थिक उन्नति को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।
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